माफीनामा

pratibha prasad
किसी के पांव पे गिर जाने से,
अपमान मत करना।
स्वाभिमान है उसका,
जो तेरे पास झुका है।
मान उसका कर ले,
थोड़ा ध्यान उसका कर ले।
सारे विषाद मिट जाएंगे,
स्नेह सुधा रस बरसेंगे।
नेह स्नेह का बंधन होगा,
तेरे माथे चंदन होगा।
यह नूतन अभिनंदन होगा,
रिश्तों का गठबंधन होगा ॥
                                                                                                            #प्रतिभा प्रसाद
 परिचय : प्रतिभा प्रसाद काफी समय से काव्य लेखन में सक्रिय है। झारखंड राज्य के जमशेदपुर जिले में राम नगर में आपका निवास है। १२ जून १९५३ में मुजफ्फरपुर में (बिहार) जन्मी और शिक्षा एमए (हिन्दी) प्राप्त की है। रुचि कहानी सहित कविता हास्य,व्यंग्य और अन्य लेखन में है। आप अखिल भारतीय कवयित्री सम्मलेन,विश्व भोजपुरी साहित्य सम्मेलन तथा प्रज्ञा भारती आदि से जुड़ी हुई हैं। कई रचना संकलनों का संपादन और संयुक्त संपादन  किया है। अतिथि संपादक ‘श्रेष्ठ  काव्य माला'(काव्य संकलन) भी रहीं हैं। सम्मान  में आपको ‘काव्य कोकिला’ अलंकरण(लखनऊ),’अक्षर कुम्भ अभिनन्दन’ सम्मान, ‘कवि रत्न’ उपाधि (भागलपुर) एवं अखिल भारतीय कवियित्री सम्मलेन से ‘विधा वाचस्पति’ सम्मान,अखिल भारतीय कवियित्री सम्मलेन से ‘सारस्वत साहित्य सम्मान'(कोलकाता) तथा कहानी संकलन ‘आख़िर एक दिन’ को सतीश स्मृति सम्मान(२०१६)मिला है। आपकी रचना ‘सास संहारक मंत्र’ कविता का जर्मन में अनुवाद हुआ है तो,कहानी एवं ‘झंकार’ काव्य संकलन आदि प्रकाशित है। श्रीमती प्रसाद की रचनाएँ स्थानीय एवं अन्य पत्र-पत्रिकाओ में प्रकाशित होती रहती हैं। आकाशवाणी (जमशेदपुर) के साथ ही स्थानीय समाचार चैनलों पर भी रचनाओं का प्रसारण हुआ है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।