अकेले ही जी लेने दो…

aarav
मुझे मेरा जीवन अकेले ही जी लेने दो…
परेशान-सा हो गया हूँ तुम सबकी बातें सुन-सुनकर,
अब मुझे खुद में हँस के,खुद में ही रो लेने दो…
नहीं चाहिए तुम सबका साथ मुझे,
मुझे मेरा जीवन अकेले ही जी लेने दो।
नफरत-सी हो गई है मुझे अब इस दुनिया से…
मुझे मेरा गम अकेले ही पी लेने दो,
नहीं चाहिए अब तुम सबका साथ मुझे..
मुझे मेरा जीवन अकेले ही….।
अब आंखों से आंसू भी बहना बंद हो गए हैं…
हो सके तो तुम भी मुझे थोड़ी खुशी दे दो,
नहीं चाहिए तुम सबका साथ मुझे…
मुझे मेरा जीवन अकेले ही….।
अब तक तुमने मुझे जाम पिलाकर जिंदा रखा था…
अब मुझे थोड़ा-सा जहर भी पी लेने दो,
नहीं चाहिए तुम सबका साथ मुझे…
मुझे मेरा जीवन अकेले ही….।
काश के तुम भी समझ पाते मेरे हाल को,
नहीं समझते तो मुझे मेरे हाल में छोड़ दो…
नहीं चाहिए तुम सबका साथ मुझे,
मुझे मेरा जीवन अकेले ही….।
हर रोज हँस-हँसकर मारते हो मुझे…
जब साथ हो तो,कभी साथ रो भी लिया करो,
नहीं चाहिए तुम सबका साथ अब मुझे…
मुझे मेरा जीवन अकेले ही…।
आज आँसूओं को स्याही बनाकर लिख रहा है ‘आरव’ तुम्हें…
मुझे मेरे गमों  के सहारे जिंदा रहने दो,
नहीं चाहिए तुम सबका साथ मुझे…
मुझे मेरा जीवन अकेले ही जी लेने दो….॥
                                                                                                        #आरव शुक्ला
परिचय : आरव शुक्ला अभी छात्र हैं,पर कविताएँ रचने का शौक रखते हैं। इनका निवास रायपुर के सुन्दर नगर (छत्तीसगढ़) में है। केवल पंद्रह वर्ष के आरव की जिंदगी को लेकर खुली समझ इनके लेखन को प्रदर्शित करती है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।