प्राकृतिक आपदाएं

sushil
-अकाल
सूखता जिस्म,
धरती की दरारें
हत चेतन।
झुलसी दूब,
पानी को निहारते
सूखे नयन।
ठूंठ से वृक्ष,
झरते हैं परिंदे
पत्तों के जैसे।
गिद्ध की आंखें,
जमीन पर बिछीं
वीभत्स लाशें।
-बाढ़
एक सैलाब,
बहाकर ले गया
सारे सपने।
उफनी नदी,
डूबते उतराते
सारे कचरे।
मन की बाढ़,
शरीर में भूकंप
कौन बचाए।
-तूफान
उठा तूफान,
दिल के घरोंदे को
उड़ा ले गया।
तेज तूफान,
दोहरे होते वृक्ष
उखड़े नहीं।
-आंधी
मन की आंधी,
कल्पना के बादल
बरसा प्रेम।
प्रेम की आंधी,
उड़ाकर ले जाती
मन की गर्द।
-प्रलय
प्रलय पल,
दे रहा है दस्तक
झुके मस्तक।
सात सागर,
मिलेंगे परस्पर
प्रलय मीत।
प्राण कंपित,
मृत्यु महासंगीत
प्रलय गीत।
धरा अम्बर,
प्रणय परस्पर
प्रलय संग।
-भूकंप
भूचाल आया,
सब डगमगाया
ध्वस्त धरती।
कुछ पल,
मानव विकास का
टूटा घमंड।
घमंड तनी,
उतुंग इमारतें
धूल में मिलीं।
जिंदा दफन,
कितने बेगुनाह
सिर्फ कराह।
-सुनामी
एक सुनामी,
दानव समंदर
खूनी मंजर।
समुद्र तट,
सुनामी का श्मशान
सर्वत्र मृत्यु।
तमाम लाशें,
तटों पर बिखरीं
नोंचते गिद्ध।
-ज्वालामुखी
मन भीतर,
सुलगा ज्वालामुखी
क्रोध का लावा।
धुएं की गर्द,
बहता हुआ लावा
मौत का सांप॥

                                                                                            #सुशील शर्मा

परिचय : सुशील कुमार शर्मा की संप्रति शासकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय(गाडरवारा,मध्यप्रदेश)में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) की है।जिला नरसिंहपुर के गाडरवारा में बसे हुए श्री शर्मा ने एम.टेक.और एम.ए. की पढ़ाई की है। साहित्य से आपका इतना नाता है कि,५ पुस्तकें प्रकाशित(गीत विप्लव,विज्ञान के आलेख,दरकती संवेदनाएं,सामाजिक सरोकार और कोरे पन्ने होने वाली हैं। आपकी साहित्यिक यात्रा के तहत देश-विदेश की विभिन्न पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में करीब ८०० रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। इंटरनेशनल रिसर्च जनरल में भी रचनाओं का प्रकाशन हुआ है।
पुरस्कार व सम्मान के रुप में विपिन जोशी राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान ‘द्रोणाचार्य सम्मान-२०१२’, सद्भावना सम्मान २००७,रचना रजत प्रतिभा

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।