चीन को चेतावनी

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suresh pattar
     एक जमाना था;भारत को सुपर कम्प्यूटर नहीं दिया गया था। एक जमाना था;भारत के प्रधानी की बात को निर्लक्षित किया जाता था। भारतीयों को गुलाम,पिछड़ा वर्ग के रूप में देखा जाता था।
     भारत अब बदल गया है। जो भारतियों को सुपरपर कम्प्यूटर नहीं दिया करते थे,जो भारत की बात अनसुनी करते थे,आज पलकें बिछाकर शाही स्वागत करते हैं। इसका मतलब साफ है;भारत बदला है। भारत की क्षमता बढ़ी है। संसार के बड़े-बड़े देश भारत की ताकत जान चुके हैं। भारत के साथ गले मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
     भारत में पहले सुनते थे,टीवी पर देखते थे कि यहाँ विस्फोट हुआ,वहाँ विस्फोट हुआ। इतने सारे लोग मर गए, इतने लोग घायल हुए। उसके बाद इस घटना के कर्ता की सजा सुनी नहीं,लेकिन आज सार्वजनिक स्थानों पर एसी घटनाएँ कम हुई हैं,और भारत का नाम सुनते ही आतंकवादी कांप रहे हैं। वे दूसरे देशों की ओर मुँह मोड़ रहे हैं। इसे विश्व के देश जान रहे हैं,लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि चीन अब भी आतंकियों के घर की रखवाली कर रहा है।
     आतंकवादी संगठन धर्म के नाम पर अधर्म की बात सोचते हैं। स्वधर्म को छोड़कर सभी धर्म उन्हें विरोधी दिखाई देते हैं। अगर कोई स्वधर्मी अपने कार्य साधना में बाधा बनते हैं,तो उनको भी जेहनुमा कर देते हैं। चीन जितना जल्द जागेगा,उतना ही इसे लाभ है। नहीं तो फल अपने हाथ में है।
     भारत एक एसा देश है,जहाँ बुद्ध, महावीर,शंकराचार्य,बसवेश्वर,कबीर जैसे अनेक महानुभावों का जन्म स्थान है। भारतवासी सभी की पूजा करते हैं। इनके तत्वों को गौरव दूत कहते हैं। चीन में भी बौद्ध धर्म है। भारतीयों को गर्व है, लेकिन अगर चीन के मन धर्म के नाम पर भारत की जनता के मन तोड़ने का दुस्साहस किया तो चीन छिद्र हो जाएगा,क्योंकि इतिहास में बहुत सारे लोगों ने उसका पाठ पढ़ा है। अब चीन की दाल नहीं गलने वाली है,तब भी चीन शैतान की रक्षा कर रहा है। ऐसा लगता है कि,शैतान को खून ही पसंद है।
     भावनात्मक आयाम छोड़कर, भौतिकी की क्षमता में भारत पहले जैसा नहीं है। एक सौ पच्चीस करोड़ जनता अपनी क्षमता जानती है। सरकार चुप बैठी तो जनता डंडा लेकर पीछे पड़ती है। इसी का परिणाम है कि,पाकिस्तान को रोज मुँहतोड़ जवाब मिल रहा है। चाहे वह सीमा पर हो,विश्व स्तर पर हो या आर्थिक व्यवस्था पर,हर मोड़ पर जवाब मिल रहा है। आजकल चीन भी नापाक करतूत करने लगा है। चीन को अब जानना जरूरी है कि,भारत पहले जैसा नहीं है। इसका सबूत है एशिया कॉरीडोर योजना,इसका सबूत है अरुण जेटली से कही गई बात और एक सबूत है सेना प्रमुख की बात ‘भारत सबको तैयार है।’ चीन को एक बात जानना और जरूरी है कि,भारत के बच्चे-बच्चे के हाथ में चीन की घटिया चीज है। शायद आगामी दिनों में चीन के लोग बिछौना बनाकर उस पर आराम से सो जाएंगें। इसका प्रयोग भारत में दिवाली के दिन कर चुके हैं,वह सफल भी रहा है। चीन समझौता एक बार तोड़े तो,उसका परिणाम बहुत कुछ होने वाला है।
     चीन को यह भी जान लेना जरूरी है कि,आगामी दिनों में दुष्ट की सजा होने वाली है। चीन को भारत की ताकत जानना है। नहीं जाने तो,सजा काटने को तैयार रहे,क्योंकि युद्ध भूमि सेना से सज्जित है। भारत के भीतर जनता तैयार है;अर्थ युद्ध करने को,जो चीन को कड़ी चेतावनी है।
                                                                                      #सुरेश जी पत्तार ‘सौरभ’
परिचय : सुरेश जी पत्तार ‘सौरभ’ बागलकोट (कर्नाटक) में रहते हैं। शिक्षा एमए,बीएड,एम.फिल. के साथ ही पी .एचडी.भी है। आप मूलतः हिन्दी के अध्यापक हैं और कविता-कहानी लिखना शौक है। नागार्जुन के काव्य में शोषित वर्ग सहित कई पत्रिकाओं में आलेख,कविताएँ,कहानी प्रकाशित हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।