चिड़िया की आँख

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कहाँ गया वह पेड़,
कहाँ है वह शाख।
जिस पर
दिखाई देती थी
अर्जुन को
चिड़िया की आँख॥
क्या
काट दिया
उस पेड़ को,
लकड़हारों ने ,
या फिर
चिड़िया को
आने ही नहीं दिया
बहारों ने॥
क्या
अर्जुन लक्ष्य से
भटक गया,
क्या
उसका बाण
तुणीर में
अटक गया॥
क्या
आज गुरु द्रोण ने
नहीं दी
अर्जुन को
लक्ष्य प्राप्त करने की
सीख,
क्या
आज के गुरु
परमतत्व को भूल
माँगने लग गए
राजमहलों में
भीख॥
क्या
चिड़िया ने
बंद कर ली
अपनी दोनों आँखें,
दिखता नहीं
उसे आज कुछ सार,
शायद हर ‘परिन्दा’
अब हो गया है
समझदार॥
तभी तो
आज के अर्जुन को
ना शाख दिखाई देती है,
ना ही साख।
उसे तो
दिखाई देता है
सिर्फ लाख॥

                                                                                 #रामशर्मा ‘परिन्दा’

परिचय : रामेश्वर शर्मा (रामशर्मा ‘परिन्दा’)का परिचय यही है कि,मूल रुप से शासकीय सेवा में सहायक अध्यापक हैं,यानी बच्चों का भविष्य बनाते हैं। आप योगाश्रम ग्राम करोली मनावर (धार, म.प्र.) में रहते हैं। 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।