साहित्य और पत्रकारिता को लेकर इन्दौर उम्मीदों का शहर- प्रो. द्विवेदी

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प्रेस क्लब में आयोजित चाय पर चर्चा में डॉ. संजय द्विवेदी शामिल

इन्दौर । ‘युवाओं का धर्म और समाज से जुड़ाव बढ़ रहा है, हम लिखते हैं पर दूसरे का लिखा पढ़ते नहीं हैं, इस आदत में बदलाव लाना ज़रूरी है। साहित्य और पत्रकारिता की राजधानी के रूप में शहर इन्दौर प्रसिद्ध है। साहित्य और पत्रकारिता को लेकर इन्दौर उम्मीदों का शहर है। साहित्य और पत्रकारिता को लेकर यहाँ गतिविधियाँ देखकर ख़ुशी होती है।’ भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने यह बात शुक्रवार शाम कही। वे इन्दौर प्रेस क्लब और मातृभाषा उन्नयन संस्थान के बैनर तले प्रेस क्लब में आयोजित साहित्य व पत्रकारिता जगत के लोगों से चाय पर चर्चा कर रहे थे।

श्री द्विवेदी का स्वागत इंदौर प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष संजय त्रिपाठी व मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने किया। साथ ही, जय सिंह रघुवंशी, सुधीर पण्डित व शिक्षाविद् डॉ. संगीता भरूका सिंघानिया ने अंगवस्त्र व पुस्तक भेंट कर अभिनंदन किया।

चर्चा का संचालन मुकेश तिवारी ने व आभार डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने माना।
चर्चा में वरिष्ठ छायाकार अभय तिवारी, पत्रकार मंगल राजपूत, वरिष्ठ लेखक दीपक शिरालकर, संदीप शर्मा, मनोज तिवारी, आदित्य उपाध्याय, वाणी जोशी, जसमीत सिंह, दामिनी सिंह ठाकुर उपस्थित रहे।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।