आओ शहीदों को दीप जलाए

0 0
Read Time1 Minute, 24 Second

आओ शहीदों को दीप जलाए
जो अपने घर लौट कर न आए।
केवल तिरंगे को ओढ कर आए,
उन सबका हम सम्मान बढ़ाए ।।

जो सीमा की कर रहे थे रखवाली
मना नहीं पाए घर पर दीपावली ।
आओ हम सबको शीश झुकाए,
श्रद्धा से उनको हम दीप जलाए।।

जिनके घर पर शोक है पसरा,
मन में उनके दुख है बस रहा।
उन सबके घर पर हम जाए,
सांतवना के दीप हम जलाए।।

जिनके घर निराशा बस रही है,
आशा की किरण न दिख रही हैं।
उन घरों में हम सब लोग जाए,
आशा का वहां एक दीप जलाए।।

प्रधान मंत्री सीमा पर है जाते, दिवाली जवानों के संग है मनाते।
उन्हेंअपने हाथो से मिठाई खिलाते
हम भी उनके घर पर सब जाए,
उनके साथ ही दिवाली मनाएं।।

इंडिया गेट पर जो ज्योति जलती,
जो हमेशा निरन्तर जलती रहती।
उस अमर ज्योति पर हम जाए,
उनके सम्मान में वहां दीप जलाए

कोरोना काल में दिवाली कैसे मनाए
केवल दो गज की दूरी हम बनाए,
और मुंह पर अपने मास्क लगाए।
तब कहीं सब शुभ दिवाली मनाएं

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

Next Post

शुभ दिवाली

Wed Nov 18 , 2020
कोरोना की पीठ पर सवार होकर आई दिवाली मुहं पर मास्क दो गज की दूरी सबको बधाई यह दिवाली एक दीया जलाओ उनके नाम जो देख नही पाए यह दिवाली छंटे अंधकार आए उजाला लक्ष्मी का हो वास मने दिवाली सबको मिले रोज़गार कोई न रहे खाली हाथ शुभ हो […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।