सांसद लल्लू सिंह व महंत राजू दास ‘राष्ट्र दीप सम्मान’ से सम्मानित

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अयोध्या । भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या संसदीय क्षेत्र से सम्पूर्ण सेवा प्रक्रम का संचालन करने वाले सांसद लल्लू सिंह जी व प्रधानमंत्री जनकल्याणकारी योजना के राष्ट्रीय महामंत्री महंत राजू दास जी को ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ द्वारा ‘राष्ट्र दीप सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान ख़बर हलचल न्यूज़ के प्रदेश संवाददाता, उत्तरप्रदेश के राजेन्द्र यादव, पत्रकार एवं अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार, पत्रकार अमरेश कुमार , अंकित यादव द्वारा प्रदान किया गया।
सांसद लल्लू सिंह जी ने चार दशक से अधिक समय राजनीति को दिया है, ओजस्वी भाव के साथ धर्म व राष्ट्र सेवा में अग्रणीय रहें हैं। साथ ही महंत राजू दास जी निरंतर राष्ट्र सेवा का अनुपम अलख जगाए हुए कार्यरत है। राष्ट्रदीप सम्मान ग्रहण करते हुए श्री लल्लू सिंह जी व महंत राजू दास जी ने मातृभाषा उन्नयन संस्थान को संचालित हिन्दी प्रचार आंदोलन के लिए शुभकामनाएं प्रदान की।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. नीना जोशी, राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी, कोषाध्यक्ष शिखा जैन, कार्यकारिणी सदस्य भावना शर्मा, नितेश गुप्ता, सपन जैन आदि ने शुभकामनाएँ दीं।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।