युवा भारत के युवा शिल्पी रहे राजीव गांधी

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राजीव गांधी युवा भारत व संचार क्रांति के जनक भारत रत्न पूर्व परधान मंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ और उनका निधन 21 मई 1991 को चुनाव प्रचार के दौरान हुआ I राजीव गांधी का पूरा नाम राजीव रत्न गांधी था I वे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी और फ़िरोज़ गांधी के पुत्र थे I शुरू से ही वे शांत व सौम्य प्रवृति के थे और मानसिक रूप से काफ़ी सुदृढ़ भी I उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा देहरादून स्थित दून स्कूल से प्राप्त की और अपनी उच्च शिक्षा को कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज व लन्दन के इम्पीरियल कॉलेज से पूरा किया I पढ़ाई के दौरान सन 1965 में उनकी मुलाक़ात एन्टानिया एड्विग एल्बिना माइनो से हुई जिन्हें पूरा देश सोनिया गांधी के नाम से जानता है I 28 फरवरी 1968 मे दोनों विवाह बंधन मे बंध गए I इनकी दो संतानें हैं – प्रियंका गांधी और राहुल गांधी I राजीव गांधी ने इंडियन एयरलाइन्स में पायलट के रूप मे भी कार्य किया I
यदि इनके राजनीतिक पक्ष की बात करें तो सारा देश जानता है कि राजीव गांधी राजनीति में आना ही नहीं चाहते थे I जब राजीव गांधी के भाई संजय गांधी का निधन हुआ तब उन्होंने अपनी माँ को सहयोग देने के लिए राजनीति मे दाखिला लिया I 11 मई 1981 को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और उसी वर्ष 15 जून को उत्तर प्रदेश के अमेठी क्षेत्र से लोक सभा के लिए निर्वाचित हुए I 31 अक्टूबर 1984 मे इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वो भारत के अब तक के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने I
जब उन्होंने अपना कार्यभार संभाला तब उन्हें अपनी क्षमता का पता ही नहीं था I शुरुआत में ही उन्हें कई नकारात्मक बातों का सामना करना पड़ा I यहाँ तक कि उन्हें नौसिखिया भी कहा गया I पर उन्होंने इन सब बातों पर ध्यान ना देते हुए अपनी ज़िम्मेदारी पूरी सक्रियता से निभाई और सबकी ज़ुबान पर ताले लगा दिए I
राजीव गांधी ने अपने शासनकाल में बहुत से ऐसे क़दम उठाए जिससे हमारा भारत वर्ष प्रगति की ओर अग्रसर हो गया I उन्होंने गरीबों के हित के लिए बहुत काम किया था I गरीबों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए उन्होंने जवाहर गारंटी योजना लागू की और साथ साथ इंदिरा आवास योजना, दस लाख कुआँ योजना जैसे योजनाओं को शुरू किया I
भारतीय राजनीती के इतिहास में राजीव गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में उभरे जिन्होंने सबसे पहले देश और सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार पर ऊँगली उठाई और इसे सामने से स्वीकारा भी I उन्होंने कहा – “उनकी सरकार में ही जनकल्याण के लिए दिल्ली से भेजे गए एक रूपये में से केवल तेरह पैसे जनता तक पहुँचते हैं शेष सत्ताशी पैसे बीच का भ्रष्ट तंत्र हज़म कर लेता है I”
उन्होंने यह भी निर्णय लिया कि देश में लाइसेंस प्रणाली को समाप्त किया जाये क्योंकि हर चीज़ के लिए लाइसेंस की ज़रूरत पड़ती थी और लाइसेंस के लिए अधिकारी रिश्वत मांगते थे I
राजीव गांधी को आतंकवाद से भरा हुआ भारत मिला था I उसके बावजूद उनके क़दम कभी डगमगाए नहीं और अपने साहस का परिचय देते हुए उन्होंने कई साहसिक – सकारात्मक निर्णय भी लिए जिसके परिणामस्वरुप राजीव-लोंगोवाल समझौता हुआ जिससे पंजाब ने आतंकवाद पर विजय का झंडा फहराया I ऐसे ही आगे असम-समझौता, मिज़ोरम-समझौता, श्रीलंका में शांति सेना का भेजना, आदि कई सही निर्णय हुए जिससे देश और जनता दोनों को लाभ मिला I
आज़ादी के बाद अमेरिका से रिश्ते के सुधार की शुरुआत राजीव गांधी ने ही की थी I यही वजह है कि आज भारत अमेरिका के सम्बन्ध मज़बूत हैं I साथ ही साथ इस नए रिश्ते की वजह से भारत अपने पुराने मित्र रूस को भी कभी नहीं भूला I
कुछ ही समय में राजीव गांधी ने पूरी दुनिया को अपनी सोच और सामर्थ्य से चकित कर दिया I उन्होंने कहा – “मैं युवा हूँ और मेरे कुछ सपने हैं जिनमें सबसे बड़ा सपना यह है कि मेरा देश स्वतंत्र, सशक्त और आत्मनिर्भरता के साथ मानवता की सेवा करने वाला अग्रणी राष्ट्र हो I”
वे मानते थे कि किसी भी देश की प्रगति में सबसे बड़ा ईंधन मानव संसाधन होता हैं I यदि वो सुरक्षित होगा तो भारत एक नए आयाम को छू लेगा I इसलिए सन1986 में एक राष्ट्रीय नीति लायी गयी जिसके अनुसार शिक्षा को महत्व देते हुए देश भर में आधुनिक स्तर की उच्च शिक्षा हेतु योजनाएं शुरू की गई I
राजीव गांधी युवाओं में भी बहुत लोकप्रिय थे I 18 साल के युवाओं को मत का अधिकार उन्होंने ही दिलवाया था I यह उनका एक दूरगामी क़दम रहा I साथ ही वे कहते थे कि भारतीय युवा स्वयं अपना प्रतिनिधि चुन सकते हैं I इसका परिणाम यह हुआ कि युवाओं में आत्मविश्वास कूट- कूट कर भर गया I
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री का इतना व्यापक दृष्टिकोण रहा है कि आज उन्हें कम्प्यूटर-क्रांति का जनक कहा जाता है I उन्होंने कहा भी था -“मेरे पास वह योजना है जो हमारे भारत को बहुत मज़बूती के साथ बीसवीं सदी से 21वीं सदी तक ले जाएगी और जहाँ भारत विश्वनायक के रूप में उभरेगा I ”
कम्प्यूटर तकनीक लाने के विषय में उन्हें कई विरोधों का सामना करना पड़ा था I लेकिन आज के सन्दर्भ में देखें तो जो भी उनके विरोधी रहे वो आज सर्वाधिक कम्प्यूटर के आगमन का स्वागत कर रहे हैं I यदि कम्प्यूटर नहीं होता तो आज हम संचार-क्रांति की वजह से विश्व के शीर्षस्थ देशों में नहीं होते I
राजीव गांधी अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना ही जनता के बीच चले जाते थे I इसी वजह से 21 मई 1991तमिलनाडु में चुनावी प्रचार में उन पर आत्मघाती हमला हुआ,जिसमे उनका निधन हो गया I
कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि राजीव गांधी ने सकारात्मक एवं विकासात्मक सोच और उसके अनुपालन में उनके महत्वपूर्ण योगदान दिया जिनमे कम्प्यूटर युग भारतीय सन्दर्भ के साथ-साथ एशियाई दृष्टिकोण में सर्वाधिक क्रांतिकारी क़दम था I 21वीं सदी में इन सब योगदानों को नहीं भुलाया जा सकता I उन्होंने हमेशा देशहित और आम जनता के लाभ के लिए ही कार्य किए हैं I
यदि आज राजीव गांधी ज़िंदा होते तो भारत अमेरिका, रूस जैसे देशों से कई गुना आगे हो सकता था I उनके रिक्त स्थान को नहीं भरा जा सकता I

#भावना शर्मा, दिल्ली

#परिचय-

सुप्रसिध्द कहानीकार भावना शर्मा मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैं।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।