हे मातृभूमि

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हे मातृभूमि ! भारत माता,
तुमको शत शत करें नमन।
प्रेम से हम सब शीश झुकाएं,
श्रृद्धा सुमन करें अर्पण।

तुम पर न्योछावर माता मेरी,
ये तन मन , सारा जीवन।
हरा भरा है आंचल तेरा मां ,
जिसको लहराए मस्त पवन।

सागर तेरे मां चरण पखारें,
है मुकुट हिमालय तेरा मां।
गंगा यमुना सी पावन नदियां,
करे शीतल तेरा तन मन मां।

हीरे मोती से अनमोल रतन,
सब तुझमें ही हैं समाएं मां।
देख सुनहरी काया तेरी ,
तेरे शत्रु सदा ललचाए मां।

रक्तपुष्प माला पहनाकर,
तुझे चंदन तिलक लगाऊं मां।
मां तेरी की रक्षा की खातिर ,
मैं अपना शीश कटाऊं मां।

आजाद, भगत, बिस्मिल जैसे,
सपूतों की तू जननी मां।
हमें गुमान है माता तुम पर,
बस इतना तुम जान लो मां।

जिह्वा पर हो गीत तुम्हारे,
नित तेरा ही गुणगान करें।
मातृभूमि जगजननी मेरी ,
मां तुम हम अभिमान करें।

धर्म भूमि मेरी हो मां तुम,
तुम कर्मभूमि हो मेरी मां।
जन्मभूमि मेरी हो मां तुम,
तुम मातृभूमि मेरी हो मां।

स्वरचित
सपना (स अ०)
जनपद – औरैया
उत्तर प्रदेश

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।