हित

0 0
Read Time30 Second

आगे बढ़ना ही हो नियति
सत्य पथ पर मिले प्रगति
जीवनउद्देश्य हो परमार्थ
समय व्यर्थ न गंवाओ पार्थ
सद्कर्म में व्यतीत हो समय
ध्यान प्रभु का हो हर समय
जीवन सुगम हो जाएगा
अच्छा समाज बन जाएगा
इसी सोच पर चलते जाओ
सबका हित करते जाओ
खुशहाल जग हो जाएगा
सतयुग स्वतः बन जाएगा।
#श्रीगोपाल नारसन

matruadmin

Next Post

कड़वा सच

Tue Sep 29 , 2020
तू भी नश्वर , मैं भी नश्वर, नश्वर है ये दुनियां सारी। घमंड करे तू किस पर प्यारे, ये सांसे भी है प्रभु की उधारी। आए हैं हम प्रभु की कृपा से, प्रभु के पास ही जाना है। किसी को आगे ,किसी को पीछे, बस आना और जाना है। कुछ […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।