
देखो देखो आया है ,
आज बसंत
देने हमको उपहार अनेक ।
करके अपार श्रृंगार इसने ,
सिखाया है हमको सज धज कर रहना।
मौसम की बहार लाया बसंत
जीवन के दुखों को हर लाया बसंत।
सजी दुल्हन सी ये धरती,
मन में उमंग सी ये भरती,
घोले मन में खुशियां अपार,
मौसम की ये न ई बहार,
देखो आया है ,आज बसंत।
उमंग और उत्साह भर जाता,
मन में मुस्कान भर जाता।
जिंदगी की सीख है बसंत।
दुःख में सुख को ,
तलाश करता बसंत।
देखो देखो आया है,
आज बसंत।
रेखा पारंगी।
बिसलपुर पाली।
राजस्थान।

