
नहीं चाहिए उपहार बस एक दिन का
नहीं चाहिए मान बस एक दिवस
नहीं चाहिए शुभकामना बस एक दिवस
देना है तो दो
हमें मान सम्मान
समझ ईश्वर् की सृष्टि हर दिवस ।।
मत रौँधो समझ धूल पैरों तले अपने
मत करो प्रताड़ित दे पीड़ा
चाहे हो मानसिक या शारीरिक
मत समझो खिलौना भर
तन मन बहलाने को ।।
देना है तो दो
मान सम्मान पूरा हर दिवस
हूँ जननी, बेटी, बहू ,पत्नी,बहन
यूँ हर रिश्ते की हूँ संवाहिनी
मैं नारी सृष्टि की देन
हूँ अनमोल
बस समझ सको तो समझो मोल
बस मोल मेरा हर दिवस ।।
मीनाक्षी सुकुमारन
नोएडा
