क्या कुर्दों के साथ हुआ विश्वासघात?

आतंकी संगठन आईएसआईएस पूरे विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है जोकि किसी भी आतंकी गतिविधि का सबसे बड़ा संगठन है जिससे पूरी दुनिया को एक जुट होकर निपटने की आवश्यकता है। इसी मुहिम में आईएसआईएस के विरूद्ध खुलकर मुकाबला करने वाला संगठन कुर्दिश लड़ाका सीरियाई डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज यानी एसडीएफ़ के हिस्सा रहे हैं और यह संगठन सीरिया में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ अमेरिका का सबसे विश्वसनीय साथी रहा है लेकिन अब अमेरिका एसडीएफ़ से अलग दूर जाकर खड़ा हो गया है। जिससे कि पूरे विश्व में बड़ा अजीब संदेश जाना स्वाभाविक है। क्योंकि, यह वही कुर्द हैं जिन्होंने अमेरिका पर विश्वास करके अमेरिका का साथ दिया और इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ अमेरिका की लड़ाई के मजबूत साझेदारी निभाई परन्तु अमेरिका ने अब उन्हीं कुर्दों को बेगाना बना दिया। अभी पूर्व में तुर्की शासक अर्दोआन सीरिया को लेकर अमेरिका भी गए थे। राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से आयोजित ग्रुप डिनर पार्टी में अर्दोआन शामिल भी हुए थे। इसके बाद ट्रंप का बयान आया था कि अर्दोआन उनके दोस्त बन गए हैं। तो एक प्रश्न उठना वाजिब है कि क्या यही दोस्ती की परिभाषा थी जोकि अब समय के साथ सामने आ रही है। जिसके संकेत अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही दे दिए थे अब उसी की वास्तविक तस्वीर सामने आई है। मध्य-पूर्व के नक्शे पर नज़र डालते हैं तो तुर्की के दक्षिण-पूर्व, सीरिया के उत्तर-पूर्व, इराक़ के उत्तर-पश्चिम में कुर्द बसते हैं। कुर्द सुन्नी मुस्लिम हैं मगर उनकी भाषा और संस्कृति अलग है कुर्द मांग करते है कि संयुक्त राष्ट्र के आत्मनिर्णय के अधिकार पर उन्हें भी अलग कुर्दिस्तान बनाने का हक़ मिले ध्यान देने वाली बात यह है कि अमेरिका ने 2003 में इराक़ पर हमला किया था तभी से उत्तरी इराक़ में कुर्द काम कर रहे हैं। तुर्की इस बात से डरा हुआ है कि यदि कुर्दों का एक राष्ट्र अलग बन गया तो तुर्की के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी साथ ही कुर्द लड़ाकों को आईएस के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए अमेरिका ने हथियार भी दे दिए हैं। हो सकता है कि भविष्य में कुर्द इतने शक्तिशाली हो जाएं कि सीरिया में आईएस से जीते हुए हिस्से तथा इराक़ के कुछ हिस्से को जोड़कर बड़ा सा कुर्द राष्ट्र बना लें, निकट भविष्य में यदि ऐसा होता है तो यह सत्य है कि तुर्की के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
अवगत करा दें कि तुर्की को यह चिंता पहले भी थी जब आईएस के ख़िलाफ़ अमेरिका क़ुर्दों से सहयोग लेना चाहा था, तब भी तुर्की ने इसका खुलकर विरोध किया था। एक ताजा बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सीरिया के कुर्दों ने आईएसआईएस के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की कोई मदद नहीं की। इस बयान के जरिए उन्होंने अमेरिकी बलों को वापस बुलाने के अपने फैसले का बचाव किया जिससे तुर्की को पूर्वोत्तर सीरिया पर हमला करने के लिए सैन्य अभियान शुरू करने का साफ रास्ता मिल गया। सीरियाई कुर्दों के बारे में माना जाता है कि वह आईएसआईएस के विरूद्ध अमेरिका का सहयोग करते हैं। परन्तु, ट्रंप ने उनके सहयोग को मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि कुर्द अपनी जमीन के लिए लड़ रहे हैं। जबकि यह सत्य नहीं है।
ज्ञात हो कि तुर्की ने पूर्वोत्तर सीरिया में कुर्दों के नियंत्रण वाले इलाकों में हवाई हमले किए जिससे अब जमीन पर भी संघर्ष होने के आसार बन रहे हैं, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने हथियार, गोला-बारूद और वेतन के लिहाज से देखें तो कुर्दों की मदद पर अत्यधिक पैसा खर्च किया है। जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत दिशा में गतिमान है। सत्यता इसके ठीक उलट है। कुर्द पत्रकार रहीम राशिदी ट्रंप के इस बयान से अपने आपको ठगा हुआ जरूर महसूस कर रहे होगें क्योंकि कुछ समय पहले ही संवाददाता सम्मेलन में जब ट्रंप ने कुर्दों के सहयोग की जमकर तारीफ की थी। इतना ही नहीं ट्रंप ने कुर्दों का अमेरिका के सहयोग के लिए अत्यंत सम्मान प्रकट करते हुए पत्रकार रहीम राशिदी को ‘मिस्टर कुर्द’ का उपनाम भी दिया था। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कुर्दों की रक्षा का वादा भी किया था। उन्होंने न्यूयॉर्क में पत्रकारों के सामने भी कहा था की कुर्द हमारे साथ लड़े हैं, उन्होंने हमारे लिए जानें दीं हैं हम यह बात कभी भी नहीं भूलेंगे।
परन्तु, समय के साथ सब कुछ तेजी के साथ बदला और अब हालात इसके ठीक उलट हो गए आज वही कुर्द अब अकेले हो गए कल तक जोकि अमेरिका के साथ आईएसआईएस के विरूद्ध लड़ रहे थे, जबकि अंतराष्ट्रीय स्तर पर आईएसआईएस पूरी दुनिया के लिए खतरा है। क्योंकि, आतंकवाद से पूरा विश्व पीड़ित है तो कुर्दों के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का यह बर्ताव पूरी दुनिया के लिए किसी विश्वासघात से कम नहीं होगा। क्योंकि, इस प्रकार की नीति से कोई भी व्यक्ति या समूह आतंक के सबसे खतरनाक संगठन आईएसआईएस के विरूद्ध फिर कभी भी नहीं खड़ा होगा। भविष्य में कोई भी अपनी जान को जोखिम में डालकर बड़े आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के मुकाबले के लिए खड़ा होने का साहस नहीं जुटा पाएगा। क्योंकि, इतना बड़ा विश्वासघात होने के बाद कोई भी कभी भी किसी पर कदापि विश्वास नहीं करेगा। तो इस प्रकार की स्थिति जब उत्पन्न हो जाएगी तो इसका सीधा फायदा आतंकवादी संगठन को होना स्वाभाविक है, इसका लाभ लेते हुए आतंकी संगठन विश्व में अपना पैर आसानी के साथ जमाते चले जाएंगे, और कोई भी समूह इनके विरूद्ध कदापि खड़ा होने का साहस नहीं जुटा पाएगा। अतः अमेरिका की इस नीति से पूरे विश्व में बड़ी त्रास्दी होने संकेत मिल रहे हैं। जोकि बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है।
राजनीतिज्ञ विश्लेषक।
(सज्जाद हैदर)

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