बारुद की गंध

kusum joshi
गर्म हवा के थपेड़े पूरे शहर को झुलसा रहे थे,कहीं कहीं बिखरे बचे खुचे पेड़ निस्तेज पड़े थे , शहर के बीचों बीच बह रही नदी उदासी में लिपटी रेंग रही है , मानों नदी के आंसू सिमट आयें हों ,  दूर दूर  छितराये हुये पेड़ो से आती सदायें सुनने की कोशिश कर रही हो,वो पेड़ की जड़ों को छूकर आना चाहती थी,पर दोनों छोरो में बड़ता उसका कछार उसे पेड़ तक पहुंचने नही दे रहा था।
      मीलों फैला क्रंकीट का जंगल उसमें रहने वाले बाशिन्दों के साथ भविष्य के प्रति आँखें मूंदे अपनी खुशफहमी के कोलाहल में डूबा था ,
    पेड़ गर्म हवा के झोंके के साथ नदी की और झुकता सा लहराया पर उसके हिस्से में आयी दर्द भरी सिसकी , तभी कुछ थकी मांदी गौरय्या पेड़ में आ बैठी , पेड़ को खुशी महसूस हुई कि वो अभी भी दूसरों को छाया देने के काबिल है,
      थकी मांदी कमजोर सी गौरय्या ने चहक कर पेड़ का शुक्रिया अदा किया,पेड़ के सूखे पत्ते खड़खड़ाये माने अपने प्यासे होने का इशारा कर रहे हैं..मरती नदी ने प्यासे पेड़ को देखा.. और उदास नजरों से आकाश को ताका…दूर दूर तक कोई बादल नही था , अपनी मजबूरी में सिसक उठा ..   तभी तेज धमाके की आवाज से मासूम चिड़िया घबरा उठी, अनायास उसकी नजर कंक्रीट के बाशिंदों में पड़ी,जहां लोग पानी को लेकर अराजक हो गये थे, उसका नन्हा सा दिल भविष्य की सोच कर कांप उठा..अब धीरे धीरे हवा में बारुद की गंध फैलने लगी थी।
#डा. कुसुम जोशी
          गाजियाबाद(उत्तर प्रदेश)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।