दो दिन सुकून से जीना मुहाल करते हैं
ये दुनिया वाले भी कितने सवाल करते हैं
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न रह सकेंगे खुश वो लोग किसी कीमत पर
जो दूसरे की खुशी पर मलाल करते हैं
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हम बेकार हैं तो भी कुछ कम मसरूफ नहीं
जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं
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हवा देने से आग और फैल जाएगी
ज़रा सी बात पर क्योंकर बवाल करते हैं
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सचबयानी के मुजरिम को शहर में तेरे
बड़ी बेदर्दी से हाकिम हलाल करते हैं
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खबर है सबको कि हो दुश्मनी या दोस्ती हम
जो भी करते हैं वो बेमिसाल करते हैं
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#भरत मल्होत्रा
परिचय :–
नाम- भरत मल्होत्रा
मुंबई(महाराष्ट्र)
शैक्षणिक योग्यता – स्नातक
वर्तमान व्यवसाय – व्यवसायी
साहित्यिक उपलब्धियां – देश व विदेश(कनाडा) के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों , व पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
सम्मान – ग्वालियर साहित्य कला परिषद् द्वारा “दीपशिखा सम्मान”, “शब्द कलश सम्मान”, “काव्य साहित्य सरताज”, “संपादक शिरोमणि”
झांसी से प्रकाशित “जय विजय” पत्रिका द्वारा ” उत्कृष्ट साहितय सेवा रचनाकार” सम्मान एव
दिल्ली के भाषा सहोदरी द्वारा सम्मानित, दिल्ली के कवि हम-तुम टीम द्वारा ” शब्द अनुराग सम्मान” व ” शब्द गंगा सम्मान” द्वारा सम्मानित
प्रकाशित पुस्तकें- सहोदरी सोपान
दीपशिखा
शब्दकलश
शब्द अनुराग
शब्द गंगा
Fri Mar 22 , 2019
जल-जल जग करे जल ना करो बर्बाद जो जल का उपयोग करे सदा रहेगा आबाद। जिस गाँव में जल नहीं वो गाँव नर्क समान दूर से ढोकर संचय करे तपती धूप हो आग समान। जल पर चर्चा जब करे कोई न खोजे उपाय सारे प्रवजन छोडकर के भविष्य का हो […]