दिन आयेगें — आशावादी विचारधारा

rajnarayan divedi

अच्छे दिन आयेगें …. , 2014 के लोकसभा चुनाव का यह एक अहम चुनावी नारा बन गया था । जो पुरे पाँच शालों तक पक्ष और विपक्ष मे इस वाक्या को लेकर बहस चलती रही । विपक्ष सवाल उठाता रहा , कहाँ है अच्छे दिन , किसके अच्छें दिन , जनता के अच्छे दिन कहाँ है । उत्तर — प्रतिउत्तर का दौर भी खूब दौर चला । टेलीविजन डीवेट की बातें तो अलग है आम चौपालों में भी चर्चा का विषय रहा ।
       “अच्छे दिन आयेंगे” इस वाक्या को जूमला कहे या आशावादी विचारधारा । मेरे मतानुसार यह एक “आशावादी विचारधारा” है । जिसे संयोकर हर व्यक्ति जीवन जीता है । एक कहावत है कि “उम्मीद पर दुनिया टीकी है” यदि मेरे से पुछा जाय की ….और वह उम्मीद क्या है तो मेरा उत्तर होगा “अच्छे दिन” । परिणाम कोई भी जेब में रख कर परिक्षा नहीं देता , व्यक्ति कर्तव्य करता है और उस कर्तव्य में परायणता ,निष्ठा ,लगन और श्रद्धा होने पर व्यक्ति के पक्ष मे परिणाम आता है । और व्यक्ति के पक्ष में परिणाम आया यानी उक्त व्यक्ति के अच्छे दिन का संकेत है । जिसका मुल्यांकन प्रतिशत में भी किया जाता है । इसमें भी 100 में 100 अंक नहीं मिलता ।
            उपरोक्त तथ्यों को देखते हुऐ 2014 लोकसभा चुनाव में अच्छे दिन के वादे कितने कारगर हुऐ , परिणाम तो 2019 के लोकसभा चुनाव में जनता तय करेगी । परन्तु समिक्षा की दृष्टि से भारतवर्ष की स्थिति पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल से वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कार्यकाल का तुलनात्मक अध्ययन करना होगा । यदि तुलनात्मक अध्ययन में नरेन्द्र मोदी जी का कार्यकाल अच्छा है तो , अच्छे दिन का शुभ संकेत है ।
         जनता के समक्ष सबसे बड़ा मुद्दा महंगाई है । पर महंगाई की स्थिति देखे तो कोई खास बदलाव नहीं है । समयानुकूल 19-20 चलती रही । विपक्ष द्वारा जीएसटी को लेकर आरोप प्रत्यारोप का खुब दौर चला ।  परन्तु जीएसटी का कोई खास प्रभाव नहीं  जनता पर नहीं पड़ा ।  देश की साख की बात करे तो आज भारतवर्ष की स्थिति विश्व के पटल पर काफी मजबूत है । पूर्व और वर्तमान में चालीस -अस्सी का अंतर है । यानी विदेशी निति मजबूत हुई है । स्वच्छता की दृष्टि से व्यक्ति के सोच में बदलाव आना अच्छे दिन का संकेत है । भष्टाचार की दृष्टि से स्थानीय स्तर पर में कोई खास बदलाव नजर नहीं आता पर आँनलाइन प्रक्रिया के कारण कुछ कमी आया है । पहले की अपेक्षा भष्टाचार बढ़ा नही है , न कमी आया । राष्ट्रीय स्तर पर कोई ऐसा वैसा घोटाला भी नही हुआ जैसे पूर्व में सुनने को मिलता रहा ।
      अच्छे दिन का कोई मापदंड नहीं है । जैसे व्यक्ति को जितना सुविधा मिले उतना ही कम है । सायकिल होने पर मोटरसाइकिल की चाहत , फिर मोटरकार इत्यादि । आम जनों के पास सुविधाएं बढ़ी है । यानी व्यक्ति अच्छे दिन के ओर अग्रसर रहा है ।
        अच्छे दिन की कामना सभी को करना चाहिए , यह एक आशावादी विचार है । मेरे मतानुसार अच्छे दिन के कुछ सूचकांक बनाकर कार्ययोजना अनुसार कार्य करने से ज्यादा अच्छा होगा ।
     व्यक्ति के मन मे अच्छे दिन का विचारधारा बनना ही अच्छे दिन का संकेत है ।

#राज नारायण द्विवेदी (समाजसेवी)

* शिक्षा — स्नातक कला (प्रतिष्ठा –भूगोल)
* कार्यक्षेत्र :– छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिला – बलरामपुर, सरगुजा , सुरजपुर, कोरिया, जशपुर रायगढ़  (समाजसेवी संस्थाओं के साथ — रायगढ़ अम्बिकापुर हेल्थ ऐसोसिएशन– राहा, केयर इंडिया, युनिसेफ छत्तीसगढ़, नेशनल इंलेक्सन वाँच ,छत्तीसगढ़ वोलेंटियर हेल्थ एसोसिएशन 2001 से …..)
*  जन्म स्थान — ग्राम — हरला ,थाना — सोनहन जिला — कैमुर भभुआ (बिहार)
*  वर्तमान निवास एवं कार्यक्षेत्र — अम्बिकापुर, जिला — सरगुजा (छत्तीसगढ़)
* अभिरुचि – समाजसेवा , साहित्यिक गतिविधियां
* लेखन विधा — शोधात्मक तथ्यों का लेखन , संस्मरण लेखन , कहानी लेखन , समिक्षात्मक लेखन 
 
साहित्यिक एवं सामाजिक संगठनों से सम्बंध —
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* हिन्दी साहित्य परिषद सरगुजा — मिड़िया प्रभारी
* महामना मालवीय मिशन सरगुजा – कोषाध्यक्ष
* अरविंदो सोसायटी अम्बिकापुर – सःसचिव
* संस्कार भारती सरगुजा — मिडिया प्रमुख 

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