फैशन ने लूट लिया ।
अब घरों का चैन
सारे बने को चले।
हीरो और हिरोइन ।I
सकल सूरत देखते नहीं।
न देखें अपनी औकात ।
होड़ करने को चले ।
फिल्मी दुनियां से आज ।l
कितने घर बर्बाद हो गए ।
इस चक्कर में पड़कर।
कितने अब भी और खड़े है l
होने को बर्बाद ।।
अब भी वक्त है बहुत ।
समल जाओ तुम लोग।
वरना कहीं के न रहगे।
इसी मायावी दुनियां में II
अपनी मानसिकता को जानो।
खुद को कम से कम पहचानो।
क्या रखा है दूसरों को देखने में ।
खुद को घर के स्तर से खुद जानो ।।
छोड़ो छाडो अब होड़ करना l
अपने आप को सही पहचानो l
करो खुद का खुद मूल्यनकन l
और अपने घर खुद स्वर्ग बना लो ll
#संजय जैन
परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।
Sat Mar 9 , 2019
१. हरड़े भरड़े आँवले, लो तीनो सम तोल। कूट पीस कर छानिए,त्रिफला है अनमोल।। २. पाँच भाँति के नमक से,करो चूर्ण तैयार। दस्तावर है औषधि, कहते पंचसकार।। ३. ताजे माखन में सखी, केसर लेओ घोल। मुख व होठों पर लगा,रंग गुलाब अमोल।। ४. सूखी मेंथी लीजिए, खाएँ मन अनुसार। किसी […]