शब्द खुद गवाही देंगे

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niraj tyagi
अंतर्मन की आशाएं , दिल के सारे सपने।
होंगे   क्या   पूरे ,उम्मीद   बनाये   रखना।।
दवात जो भरी है अपने ही अश्को की स्याही से,
क्या सच लिख पाएगी कलम,ये उम्मीद बनाये रखना।
आजकल ये रोज मैं जो पन्नो पर बाट रहा है।
ये टूटे सपने है मेरे,जिन्हें मैं रोज छाट रहा हूँ।।
मेरे सवालों का जवाब देना किसी के लिए जरूरी नही है।
कमजोर किस्सों को याद रखना किसी की मजबूरी नही है।।
पन्नो पर लिखे लम्हो का कोई मोल करेगा, जरूरी नही है।
शब्द बोलेंगे अपनी सच्चाई जरूर क्योंकि उनकी कोई
भी   झूठ   बोलने   की   मजबूरी   नही   है ।।
किताबो में लिखे जो शब्द वो खुद अपनी गवाही देंगे।
किये जो भी अपराध,आज नही तो कल सजा देंगे।।
अपने भाव व्यक्त करने में कोई कोताही ना करना।
मन की सही बाते उतरे पन्नो पर बस इतनी सच्चाई रखना।।
#नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश )

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