नसीरुद्दीन शाह की संवेदना सलेक्टिव क्यों? किसके इशारे पर दिया यह बयान? : विहिप

vinod bansal

नई दिल्ली|

विश्व हिन्दू परिषद् का कहना है कि पैसे लेकर अभिनय करना नसीरुद्दीन शाह का पेशा है. बुलंदशहर की घटना पर दिया गया उनका बयान भी इसी प्रकार प्रायोजित लगता है. विहिप के संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने आज कहा कि अब सबको स्पष्ट हो गया है कि पिछले चुनाव से पहले इसी प्रकार पुरस्कार वापसी ब्रिगेड का अभियान पूरी तरह प्रायोजित था. साफ लगता है कि 2019 नजदीक आते-आते इस प्रकार के बयानों की श्रृंखला प्रारंभ होने वाली है. कई बरसाती मेंढक अपने निराधार बयानों को लेकर सामने आएंगे. परंतु नसीरुद्दीन शाह का ताजा बयान केवल राजनैतिक ही नहीं वल्कि घोर सांप्रदायिक व देश के माहौल को बिगाड़ने वाला भी है. उन्होंने चेताया कि ऐसे लोग गौरक्षा के कार्य को अपमानित करके हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का दुस्साहस न करें.

डॉ जैन ने पूछा कि 1984 में सिखों व 1990 में कश्मीर घाटी में हिंदुओं के नरसंहार के समय इनकी संवेदना व क्रोध क्यों प्रकट नहीं हुए थे? जब गोधरा में महिलाओं और बच्चों समेत 59 मासूम हिंदुओं को जिंदा जलाया गया था तब इनका क्रोध क्यों शांत हो गया था? मल्लापुरम जैसे कई मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में रमजान के अवसर पर हिंदू बच्चों को स्कूल के शौचालय में जाकर भोजन करना पड़ता है. क्या यह घटना किसी की संवेदनाओं को झकझोरने के लिए पर्याप्त नहीं है? अंकित, चंदन, प्रशांत पुजारी, अरुण माहोर जैसे सैकड़ों हिंदुओं की हत्या जिहाद के नाम पर कर दी जाती है तब क्यों इनका ट्विटर शांत हो जाता है? इन्हीं के शहर मुंबई के आजाद मैदान में जब उन्मादी जिहादियों की भीड़ हिंसा का नंगा नाच खेलती है और शहीद स्मारक को ध्वस्त कर देती है, तब इन कथित सेकुलर वादियों में से किसी एक की भी आवाज क्यों नहीं उठी? ऐसे कई प्रश्न है जिनके जवाब इन जैसे सेकुलर बिरादरी के लोगों को देने पड़ेंगे.

विहिप महा मंत्री के यह भी कहा कि ये लोग देश की जनता के द्वारा सर माथे पर चढ़ाए जाते हैं. परंतु चंद स्वार्थों के कारण ये देश का माहौल खराब करते हैं.  इनको यह जवाब तो अवश्य देना होगा कि ये जिस देश में  रहते हैं और जिस देश ने उनको बड़ा बनाया है वे उसी देश को माहौल को तनावपूर्ण क्यों बनाना चाहते हैं? एक चुनी हुई सरकार को हटाने के लिए किसी राजनीतिक संरक्षण के कारण  क्यों वे देश में सांप्रदायिक तनाव  फैलाना चाहते हैं? देश के प्रति कुछ संवेदनशीलता की अपेक्षा इनसे अवश्य की जाती है अन्यथा यह मानना पड़ेगा की इन जैसे अभिनेताओं ने हिंदू महिलाओं के साथ विवाह करके लव जिहाद को ही साकार किया है. ये अपने बच्चों को कुरान का पाठ पढ़ा कर उसी जेहाद के मार्ग पर ले जाना चाहते हैं जिस मार्ग पर वे स्वयं चल रहे हैं.

विश्व हिंदू परिषद इस तरह के बयानों की कठोरतम शब्दों में निंदा करती है और उम्मीद करती है कि पिछले चुनावों की तरह इस बार ये लोग देश के माहौल को खराब करने के लिए अपना कंधा नहीं सौंपेंगे. विहिप किसी भी हत्या की निंदा करती है, चाहे वह किसी मानव की हो या गौमाता की.  परन्तु गौरक्षा के संबंध में कोई भी टिप्पणी करने से पहले जांच के परिणाम की प्रतीक्षा करनी चाहिए. गौरक्षा के कार्य को अपमानित करके वे हिंदुओं की भावनाओं को आहत न करें.

#विनोद बंसल

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।