सफर

0 0
Read Time2 Minute, 42 Second
niraj tyagi
तरुण अपने किसी काम से ग़ाज़ियाबाद से इलाहाबाद के लिए गया।इलाहाबाद के स्टेशन पर उतरते हुए उसने एक रिक्शा वाले को बुलाया और उसे एक स्थान पर पहुचाने के लिए कहा।रिक्शा वाले ने तरुण को रिक्शा में बैठाया और उस स्थान की और बढ़ गया।लगभग आधे घंटे रिक्शावाला उसके साथ रहा।
इस समय मे रिक्शावाला उससे काफी घुल मिल गया। तरुण को भी उससे बातचीत करना काफी ठीक लग रहा था।रास्ते में तरुण को बैंक दिखाई दिया इसी बैंक में उसका अकाउंट भी था।उसने रिक्शावाले से कहा कि मैं जरा बैंक से 5 मिनट का काम करके बाहर आ रहा हूँ।बस वो थोड़ी देर उसका बाहर इन्तेजार करे।
रिक्शा वाले ने कहा साहब मैं बाहर खड़ा हूँ। आप कृपया मुझे ₹100 दे दो। मैं आपका इंतजार कर लूंगा और यदि ज्यादा देर लगी तो मैं चला जाऊँगा।तरुण ने रिक्शा वाले को ₹100 दिए और बैंक के अंदर चला गया। लगभग 5  मिनट के अंतराल के बाद रिक्शा वाले के पास आया।
बाहर आकर उसने देखा रिक्शावाला कहीं नहीं है।रिक्शावाला ₹100 लेकर वहाँ से जा चुका था।तरुण ने एक दूसरे रिक्शा वाले को बुलाया और उसमे बैठकर अपनी मंजिल की और आगे बढ़ गया।ये रिक्शावाला तरुण को रेलवे स्टेशन के पास से 100 कदम की दूरी आगे एक घर के बाहर छोड़कर बोला साहब आपकीं मंजिल आ गयी।
तरुण अपनी मंजिल को स्टेशन के इतने पास पाकर अपने आपको पहले रिक्शावाले के हाथों ठगा हुआ सा महसूस कर रहा था।किसी दूसरे देश मे ऐसा होता तो भी ठीक था, किंतु अपने देश मे अपने ही लोगो से ठगे जाने पर तरुण का दिल बहुत दुखी था।जिस 100 कदम की दूरी को वो पैदल चलकर तय कर सकता था।वो उसने 200रुपये में तय की।अब वो समझ चुका था कि रिक्शावाला उसे स्टेशन पर देख कर ही पहचान गया था कि उसे अपनी मंजिल की दूरी के बारे में नही पता है कि वो जगह स्टेशन के सामने ही है।
#नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश )

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

ग्वालियर की मिट्टी को नमन...

Wed Dec 26 , 2018
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी… एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीति को अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से इस तरह प्रभावित किया जिसकी मिसाल नहीं मिलती। 1975 में कांग्रेस और 1977-80 में जनता पार्टी की सरकार के दौरान उनका आगमन रक्सौल में हुआ था। उस दौरान मैं रक्सौल के हजारीमल उच्च […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।