मेरा संविधान

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avinash tiwari
लोकतंत्र का अभिमान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ।
मुझमे बसा है भारत देखो
हिंदुस्तान की जान हूँ। ।
मैने समता सम्प्रुभता से
भारत को सींचा था।
बाबा के सपनों में मैंने
समाज वाद भी देखा था।।
टूटे मेरे सपने स्वराज के
राजघाट में लेटा हूँ।
संसद के गलियारों में
हंसता हूँ कभी रोता हूं।।
मैने भाषण की आज़ादी दी
तुम देश को खंडित करते हो।
जे एन यू में बैठ के द्रोही
देश के टुकड़े करते हो।
संसद की भाषा भी देखी
कुर्सी टेबल टूटते हैं,
आंख मिचौली करते नेता
मर्यादा भी खोते हैं।
धर्म निरपेक्ष राष्ट्र बनाया
भाईचारा बना रहे।
किन्तु लड़ रहे धर्म पर
खून अपना ही बहा रहे।
बाबा गांधी के सपनो को
आओ सफल बनाना है।
राष्ट्र हित है सर्वोपरि
संविधान अमर बनाना है।
#अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।