किसी का क्या जो कदमो पर जबी ए बंदगी रख दी
हमारी चीज थी हमने जहाँ जानी वहां रख दी /
जो दिल माँगा तो वो बोले ठहरो याद करने दो /
जरा सी चीज थी हमने न जाने कहाँ रख दी /1/
तुम्हे अब भूल जाये तो अच्छा है
ये फैसले और भी बढ़ जाये तो अच्छा है /
तुम्हारी चाहते हमको नहीं हासिल /
और तो, अब गैर ही बन जाए तो अच्छा है /२/
बाग़ में टहलते हुए एक दिन /
जब वो बेनकाब हो गए /
जितने भी पेड़ थे बाबुल के /
सब के सब गुलाब हो गये /३/
कदर की होती हमने तेरी प्यार की /
तो आज हम साथ साथ होते /
और न थामना पड़ता हाथ किसी और का /
अब तो जो तेरा हाल है वही मेरा हाल है /
अलग अलग तरह से हम दोनों जी रहे जिंदगी /4/
#संजय जैन
परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।
Sat Oct 20 , 2018
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