भगत सिंह नाम है मेरा 

nilima mishra
वो गोली आज तक  छलनी है करती जानों
दिल अपने ,
है जलियाँबाग का मातम मेरी आँखों में
बचपन से ।
भगत सिंह नाम है मेरा मैं फ़ौलादी हूँ तन
मन  से,
मेरा चोला बसंती  रंग दिया है माँ ने
बचपन से ।
क़सम खाता हूँ मैं अपनी हर इक आज़ाद
धड़कन से ,
निभाऊँगा मैं पूरा फ़र्ज़ मिट्टी के हर एक
कण से ।
सितम की इन्तहा भी कर ले तू ऐ जान
दुश्मन  के ,
यही है ख्वाब मेरा मुल्क हो आज़ाद
दुश्मन  से ।
जवानी काम आ जाये वतन की शान की
ख़ातिर ,
रगों में दौड़ता है खून हर पल बस इसी
धुन में ।
मेरे साथी है बटुकेश्वर ,जतिन ,आज़ाद और
सुखदेव ,
सभी का एक है रस्ता सभी बाँधे कफ़न सर
 पे ।
वो लाला जी पे करना जुर्म न बर्दाश्त
हमको था ,
मिली सांडर्स को इसकी सजा लाहौर  के
पथ में ।
वो बम फेंका था जब संसद में हम तो भाग
सकते थे ,
मगर हम पीठ पर कब वार करते अपने
दुश्मन के ।
मुझे साम्राज्यवादी ताक़तों को बस
कुचलना है ,
हो ज़िंदाबाद का नारा बुलंदी पर जमीं
नभ में   ।
न रोना एक भी आँसू शहीदों की मज़ारों
पर ,
चढ़ाना फूल उन पर  अपने केवल ह्रदय
उपवन के ।
अभी भी मुल्क में बाक़ी हैं कितने  काम
करने हैं ।
बचा कर लाज रखो शान झंडे की नये
युग में ।
#डा० नीलिमा मिश्रा

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आत्मसंतुष्टि 

Sat Sep 29 , 2018
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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।