
हे रंग आज बरस
तू बादल बनकर,,,
अंग भिंग जाये तुम्हे
कही सुनकर,,,
लाल भी आये
तुम्हारे गालो के लिए छुपकर,,,
नीलले काले भी गिरे
आज रुक रुककर,,,
गोरी गाल ना
छिपाये हमे शर्माकर,,,
झरोखों की दिशाएं
हर को ले जाये बहाकर,,,
हे रंग आज बादल बन
बरसना हमपे आज जमकर,,,
कोई अंग ना
चल पाये कही तनकर,,,
प्रेम,स्नेह,मिलन
हम चले कही मानकर,,,
हमे ख़ुशी है अब
भी कही जानकर,,,
कोई चले ना
आज अंगों पे कपड़े ढककर,,,
कोई अपनी गलियों से
ना जा पाये हमसे रूठकर,,,
#प्रभाकर शुक्ला

