सावन में साजन

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sandhya

सावन में साजन से मिलना अच्छा लगता है ।
मेहंदी और महावर  से सजना अच्छा लगता है ।
ये चूड़ी और कंगना अच्छा लगता है ।
अमवा की डाली पर झूला डालकर ,
साजन संग झूलना अच्छा लगता है ।
माथे पर बिदियाँ और आँखों में काजल अच्छा लगता है।
सखियों के संग नाचना-गाना अच्छा लगता है ।
ढोलक की थाप पर कजरी गाना अच्छा लगता है ।
शाम सवेरे खुद को महकाना अच्छा लगता है ।
कानों में बाली और बालों में गजरा अच्छा लगता है।
सखियों संग सावन अच्छा लगता है ।
रिमझिम बरखा और बादल का गरजना अच्छा लगता है।
मिट्टी की खुशबू और चिड़ियों का चहकना अच्छा लगता है ।
कोयल की कुहू – कुहू और मोर का नृत्य अच्छा लगता है मेंढक की टर्र – टर्र
और जुगुन का चमकना अच्छा लगता है।

बगिया में फूलों और पेड़ों पर झूलो का संग अच्छा लगता है।
चाय संग चटनी से गर्म पकौडा अच्छा लगता है।
घेवर संग फैनी और रसगुल्ला अच्छा लगता है।
कागज की कश्ती और नाली का पानी अच्छा लगता है।
सखी सावन में साजन का संग अच्छा लगता है।।

संध्या चतुर्वेदी।
मथुरा उप

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।