पुस्तक समीक्षा: गहरे भावों की कविताएं हैं मृदुला की

0 0
Read Time1 Minute, 40 Second

पुस्तक समीक्षा: गहरे भावों की कविताएं हैं मृदुला की

IMG-20180828-WA0005

डाक्टर मृदुला शुक्ला की कविताएं सहजता से पाठकों के हृदय की बात करती प्रतीत होती हैं। ‘शतदल’ शीघ्र प्रकाशित होकर आया उनका यह संग्रह हिंदी काव्य जगत में अपनी गहरी पहचान बना रहा है। इससे पहले मृदुला के दो काव्य संग्रह मृदुलांजलि और भक्तयांजलि पाठकों मे चर्चित और प्रशंसित हो चुकें हैं ।व्यवसायिता की अंधी दौड़ में जहाँ संवेदनाएं तार-तार हो रहीं हो ऐसे मे मृदुला अध्यात्मिक चेतना से समाज की बिखरी -टूटी  संवेदनाओं को पुरजोर जोड़ने की कोशिश करती हुई दीख पड़ती हैं। श्रृंगार की विस्तृत भाव भूमि पर मृदुला की कविताएं पाठकों के हृदयों में समता- ममता का बीजारोपण करती हुईं महसूस होतीं  हैं। मृदुला की कविताएं ,समय के साथ चलती हुई पावन गंगा की धारा के समान समाज के कोर- कोर, पोर-पोर में हलचल करती हुई आगे बढतीं हैं। बहरहाल उनकी शतदल की सौ कविताओं का हिंदी जगत में स्वागत जरूर करेगा।
पुस्तक -शतदल( काव्य संग्रह)
कवयित्री- डा मृदुला शुक्ला ‘मृदु’
प्रकाशन -नमन प्रकाशन लखनऊ
मू.280/
समीक्षक- सुरेश सौरभ निर्मल नगर लखीमपुर खीरी

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

कुछ_रिश्ते

Wed Aug 29 , 2018
कुछ रिश्तों में हमे अपनी कमी हमेशा बरकरार रखनी चाहिए,आप यदि हर समय उनके लिए उपलब्ध रहेंगे तो आप उस चीज को महसूस नही कर पाएंगे कि आप उनके लिए कितने खास है,या फिर शायद वो आपको महसूस न करा पाए कि आप उनके लिए कितनी अहमियत रखते है, मैं […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।