“स्वतंत्रता दिवस”

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kumari priyanka
सर्वोदय जन जन का मंत्र हो,
आम जनता कभी न त्रस्त हो,
सभी अपने कार्यों में व्यस्त हो,
नव निर्माण का पथ प्रशस्त हो,
दिलों से सभी के बैर ध्वस्त हो,
दैनिक जीवन की वस्तु सस्त हो,
बार-बार ये पन्द्रह अगस्त हो।
देश में मजबूत सुरक्षा तंत्र हो,
सूर्य अपने समय से अस्त हो,
नेता सभी संसद में व्यस्त हो,
देश!प्रगति का पथ प्रशस्त हो,
पूरी दुनिया से दुश्मनी ध्वस्त हो,
विद्यालयों में पढ़ाई मस्त हो,
बार-बार ये पन्द्रह अगस्त हो।
शिक्षण का संस्थान सर्वत्र हो,
गरीबी से कोई भी न त्रस्त हो,
अपने कार्यों में सभी व्यस्त हो,
बेरोजगारी की समस्या खत्म हो,
सम्पूर्ण देश की जनता मस्त हो,
बार-बार ये पन्द्रह अगस्त हो।
दिलो में मानवता का अभ्युदय हो,
सम्पूर्ण हिंदुस्तान शांति मय हो,
सभी शिक्षित और स्वस्थ हो,
भ्रष्टाचार-व्यभिचार का अस्त हो,
भारत का गुणगान का सर्वत्र हो,
बार-बार ये पन्द्रह अगस्त हो।।(इति)
   “कुमारी प्रियंका”

matruadmin

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।