कैसे बने बालक कुलदीपक ?

sanjay

बालक को गृहदीपक या कुलदीपक बनाना हो तो उसकी इच्छानुसार चलने नहीं देना। दीपक अर्थात् प्रकाश करने वालाकिन्तु जलाने वाला नहीं। कुलदीपक अर्थात् कुल को प्रकाशित करने वालाकिन्तु कुल को जलाने वाला नहीं! इसलिए बालक में सुसंस्कार डालो। अमुक धर्म-क्रिया तो करनी ही चाहिएऐसी आज्ञा भी करो। धर्म की आज्ञाओं का जैसे भी संभव हो पालन कराओ। जैन का बालक पूजा और सामायिक के बिना कैसे रहे? ‘होगाबालक है! होगाबालक है,’ ऐसा व्यवहार करोगे तो जीवनपर्यन्त रोना पडेगा। अंकुश होगा तो वही बालक पिताजी-पिताजी’ करेगा। मुंह से वाक्य निकले तो मानो मोती निकल रहे हैंबडों को हाथ जोडे और आत्महितकारी बडों की प्रत्येक आज्ञा को सिरोधार्य ही माने।

बालकों को मौजमजे में जोडनाहोटल मेंनाटक-चेटक या सिनेमा में भेजनायह इरादापूर्वक उनके आत्महित का खून करने के बराबर है। आज के माता-पिता तो ऐसे स्थानों में उनको साथ लेकर जाते हैं और रसपूर्वक उसका वर्णन करके बताते हैं। अच्छा तो याद नहीं रहताकिन्तु भाण्ड-चेष्टा याद रखते हैं। सामान्य ढंग से विलास-अभिनय सबको याद रहता है और यह स्थान अंत में जीवन को बर्बाद करता है। वहां प्रायः विषयविलास और श्रृंगार का उत्तेजन होता है। ऐसे कुमार्ग को प्रेरित करने वाले स्थानों में जाने से रोकने के लिए सन्तान के पिताजी मना करते हैंतो बालक दो-चार दिन रोता भी हैकिन्तु बाद में जिंदगी भर का रोना मिट जाता है। लेकिन यदि वहां पिताजी को उस पर दया आती है तो धर्मदृष्टि से कहा जाता है कि पिता दयालु नहीं हैअपितु निर्दयी है। संतति के आत्महित का नाश करनायह तो स्पष्टतः निर्दयता है। कभी बालक सर्प को खिलौना समझकर पकडने जाता हैजलते हुए अंगारे में भी हाथ डालता हैकिन्तु,मां-बाप तो उसको रोकेंगे ही नमुंह में मिट्टी और कोयला डालता हैतो उसकी मां मुंह में अंगुली डालकर निकाल देती है नउल्टी कराकर भी निकालती है। रुलाकर तथा उसे मारकर भी निकलवाती है। कई भवाभिनन्दी माता-पिता को यह भय रहता है कि यदि इसमें नहीं जोडेंगे और अच्छे स्थान में जोडेंगे तो यह साधु बन जाएगा तो?’ लेकिन यह तो सोचो कि जन्म सेबाल्यकाल से यदि बालक को संस्कारी बनाओगेतो बाहर निकलेगा यानी साधु बनेगा तो वह दिवाकर रूप बनेगा। और घर में रहेगा तो भी दीपक जैसा कुलप्रकाशक बनेगा। दिवाकर बनने वाला जग को प्रकाशित करेगा और दीपक बनने वाला कुल को प्रकाशित करेगा। किन्तु नाटक मेंसिनेमा के कीडे बनकर और मौज-मजे में रहने वाले बनाओगे तो कैसे बनेंगेजगत में निंदा कराए और घर की बदनामी कराए वैसे। देव-गुरु-धर्म की मजाक कराए वैसे और मां-बाप की इज्जत को मिटाए वैसे।

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

matruadmin

Next Post

धड़क प्यार भरी भडकन

Sat Jul 21 , 2018
धड़क:- *प्यार भरी धड़कन* इदरीस खत्री द्वारा निर्देशक :- शशांक खैतान संगीत :- अतुल-अजय कास्ट:- इशांत खट्टर, जहान्वी कपूर, आशुतोष राणा, खरज मुखर्जी, विश्वनाथ चटर्जी अवधि :- 137 मिनट मूल परिकल्पना मराठी फिल्म सैराट का रीमेक है फ़िल्म सैराट मराठी सिनेमा की केवल एक फ़िल्म नही वृतांत थी जिसकी लागत […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।