मौसर रो चक्कर …

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jaswant
लापसी न नुंगती खा रिया ,
और खा रिया दाल पूड़ी ।
किकर गला सु कव्वो उतरे ,
टूटे जद किणरी चूड़ी ।।
मौसर रा चटकारा लेवो  ,
खूब दबा न जीमण जीमो ।
आधी उमर में बापू मर गियो ,
कोणी करवायो उणरो बिमो ।।
घरका रो रिया घणा जोर सु ,
वो दुखड़ो कोनी दिख रियो ।
मिनखा ने घणी टेंशन वे जावे  ,
खाटी छा वालो नी दिख रियो ।।
मर गिया जो पाछा नी आवे ,
पण घरका ने दुःखी मति करो ।
मौसर करवा में पसीनो छूटे न ,
सगळा के रिया कलशिया भरो ।।
मरवा री टेंशन भूल जावे ,
समाज री टेंशन खा जावे ।
बारा दिन ताई सूबे शाम ,
बीड़ी,चाय न अम्ला छावे ।।
समाज रा तौर तरीका सु ,
धुजवा लागे गरीब परिवार ।
सगळो टोटको करणो पड़सी ,
भले घर में कोनी दाणा चार ।।
इण मौसर रा चक्कर माय ,
बेटा रे घणो कर्जो चढ़ जावे ।
रकमा गिरवी मेलनी पड़े न ,
खेत कुडा वेचना पड़ जावे ।।
परो बन्द करो इण मौसर ने ,
“जसवंत” करे समाज सु अरदास ।
मरवा वालों तो स्वर्ग जावेलो पण ,
लारला बण जासी कर्जा सु लाश ।।

नाम – जसवंत लाल बोलीवाल ( खटीक )

पिताजी का नाम – श्री लालूराम जी खटीक ( व.अ.)

माता जी का नाम – श्रीमती मांगी देवी

धर्मपत्नी – पूजा कुमारी खटीक ( अध्यापिका )

शिक्षा – B.tech in Computer Science

व्यवसाय – मातेश्वरी किराणा स्टोर , रतना का गुड़ा

राजसमन्द ( राज .) 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।