
तेरा मुझसे मिलना
मुझे आज भी याद है
निगाहों में बसा वो
पहली नज़र का प्यार
हाँ मुझे आज भी याद है ॥
था इक हसी इतेफाक
हुई जब तुझसे मुलाक़ात
प्यार करना नहीं था ..
फिर भी हुआ तेरे साथ ॥
ये तो बस रूहों का था मिलाप ॥
वो पहली नज़र का प्यार
हाँ मुझे आज भी याद है ॥
वो तेरा शायराना अंदाजे बयाँ …
करते जो हमसे प्यार
यूँ सरेआम कह दिया ॥
तुझे देख मेरी पलकों का
शरमा कर झुक जाना
जैसे तुझे इज़हारे मुहब्बत का पता देना ॥
वो इक हसी सा ख़्वाब ..
जो देखा हमने साथ …
पल पल लम्हा लम्हा याद है
वो तेरी सांसों की महक ..
वो तेरे लफ्जों में चहक ..
वो तेरे पहलू में खो जाना
वो तेरे शानो पे मेरा सर रखना
आंखों आंखों में जाम चखना
तेरा मेरी रूह को छू लेना
मुझे आज भी याद है ॥
वो तेरे हाथों की गरमी का एहसास
जैसे आज भी हो पहने
मेरी कलाइयों ने तेरे हाथों क़े गहने
वो हर इक बात ..वो अधूरी मुलाक़ात
मुझे आज भी याद है ॥
वो पहली नज़र का प्यार ….
उफ़्फ़ भूली नहीं हूँ …
मुझे आज भी याद है ….पल पल साथ है ..
हाँ याद है मुझे …तेरा मेरा रुहे इकरार
तुम्ही पहला ओर तुम्ही मेरा आखिरी प्यार
हमारा वो ख़्वाब
#उफ़्फ़ ….वो पहला पहला प्यार ॥
#डेज़ी जूनेजा
नाम………डेज़ी जूनेजा
पता…….मोहाली (चंडीगढ़ )
सम्मान…काव्य दंगल साहित्य प्रतियोगिता सम्मान पत्र
( 2) काव्य सागर सम्मान ॥
प्रकाशन___*गूलनार ओर मृगनयनी* सांझा काव्य संग्रह
सत्यम प्रकाशन ओर ऋषि ज़ी क़े नेतृत्व में
*एक मुलाक़ात* (प्रकाशाधिन ) प्रीति सूराना ज़ी क़े नेतृत्व में ..