वहशी दरिंदे 

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रमेश सीधा – सादा अंतर्मुखी युवक था । स्नातक के अंतिम वर्ष तक आते आते भी महाविद्यालय में उसके कोई स्थाई मित्र नहीं बने थे । रमेश के इस व्यवहार से अनेक आवारा छात्र अक्सर उसे परेशान किया करते थे । खुद को असुरक्षित पाकर भी वह सबकी अनदेखी ही करता जिससे वे और कुपित होकर उसे परेशान करते। ऐसे में सुधीर उसे अक्सर बचाता रहता था जिससे धीरे – धीरे दोनों में मित्रता हो गई । वैसे सुधीर भी बिगड़ैल युवक ही था पर रमेश के लिए यह बात मायने नही रखती थी ।
रमेश पढ़ाई में कुशाग्र था किंतु सुधीर कमजोर था । परीक्षा के समय रमेश ने उसकी मदद कर दी जिससे वे और नजदीक आ गए।
एक दिन महाविद्यालय में ” वहशी दरिंदों ” पर वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था । रमेश इस पर खूब बोला और प्रथम स्थान पर आया । सभी ने उसकी तारीफ की । इसी बात का जश्न मनाने सुधीर ने रमेश से कहा – चलो आज पार्टी करते हैं और दोनों वहां से सुधीर की बाइक पर निकल गए । एक रेस्तरां में पहुंचकर सुधीर ने मनमानी करते हुए रमेश को भी शराब पिला ही दी । अब दोनों बहक रहे थे।
रेस्तरां से निकल कर सुधीर और रमेश पहाड़ी इलाके में जा पहुंचे । उन्हें पता ही नही था कि वे जा कहाँ रहे हैं ? पास ही एक झरने को देखकर वे रुक गए । दोनों उन्मान्दित थे और उनका युवा मन हिलोरे मार रहा था । तभी उनकी नजर झरने पर नहाती हुई एक युवती पर पड़ी । वह अपनी धुन में गुनगुनाती हुई नहा रही थी ।
रमेश ने सुधीर से वापस चलने को कहा पर सुधीर तो कुछ और ही सोच बैठा था । वह दबे कदमों से आगे बढ़ा और उसने उस युवती को लगभग खींचते हुए धर दबोचा। इस समय उस पर वासना की वहशियत और दरिंदगी सवार थी । युवती चीखती रही मगर सुधीर अपने निर्लज मकसद में कामयाब हो ही गया । यह देख रमेश भी खुद को रोक नही सका और टूट पड़ा उस अनजान युवती पर ।
थोड़ी देर में ही युवती की चीख पुकार सुन ग्रामीण जन आ गए और दोनों को पकड़ लिया । पिटाई के बाद उनका जुलुस निकाल कर पुलिस के हवाले कर दिया। दोनों को सजा हो गई ।
यह कैसी दरिंदगी और वहशीपन था जिसने एक पल के जूनून में अपना विवेक खोकर तीन जिंदगियां और परिवार बर्बाद कर दिए ।
 #देवेन्द्र सोनी , इटारसी।

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