स्वतंत्रता दिवस की सार्थकता

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rajesh sharma
संदर्भ:- 15 अगस्त
   भारत को ब्रिटिश सरकार से छुटकारा दिलाने के लिए कई क्रांतिकारियों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए तब जाकर हमारा देश आजाद हुआ। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में तांत्या तोपे, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई ने अपने प्राणों की बाज़ी लगा दी थी। आज़ादी की लड़ाई देश के इतिहास का अहम हिस्सा है। 15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हुआ। सरदार भगत सिंह,चन्द्रशेखर आज़ाद, सुभाषचन्द्र बोस,मंगल पांडे,अशफाक उल्ला खां ,लाला लाजपतराय ,विपिन चन्द्र पाल,बाल गंगाधर तिलक जैसे वीरों ने अंग्रेजी सरकार के छक्के छुड़ा दिए थे। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी।
15 अगस्त को हम सब भारतीयों का कर्तव्य है कि हम उन अमर शहीदों के बारे में विद्यालयों महाविद्यालयों में अधिक से अधिक जानकारी दे।  सैंकड़ों फांसी के फंदे पर झूल गए उनकी जानकारी दें। कईं क्रांतिकारियों देश भक्तों ने काले पानी की सजा भुगती। बहुत से क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की यातनाएं सही लाठियाँ खाई। बडे बर्बरता से अंग्रेज पेश आते थे वह अपमान सहा। शोषण,अत्याचार सहे सिर्फ भारत को गुलामी से आज़ाद कराने के लिए । आइए हम उन वीर शहीदों के बारे में जन जन को बताएं।
  आज़ादी के लिए आम जनता ने उस समय अपने निजी स्वार्थों के त्याग किया। महात्मा गांधी के साथ आज़ादी की लड़ाई में लग गए।
  अहिंसा के बल पर गांधी जी ने आज़ादी दिला दी।
दे दी हमें आज़ादी खड्ग बिना ढाल।
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।।
 गोरे भी गाँधीजी से बहुत प्रभावित हुए। असहयोग आंदोलन,दांडी मार्च ये सब गाँधीजी ने किए। सभी को न्याय दिलाया।
  गांधी जी एक प्यारा गीत बोलते थे जो दिव्य संदेश देता है।
वैष्णव जन तो तेने कहिए
जो पीर पराई जाने रे….
गाँधीजी ने परहित करना सिखाया। हमेशा दुसरो की पहले सोचो। दुसरो को सुख दो तभी तुम सुखी रहोगे। आज हम दूसरों की नहीं खुद की भलाई में लगे हैं। ये अंधी दौड़ है।
    आज़ादी के इतने साल बाद भी हम गरीबी बेरोजगारी आर्थिक पिछड़ापन बेकारी के साथ ही भुखमरी जैसी समस्याओं से दुखी है। इन सबसे छुटकारा पाने के लिए एक दूसरे की गुलामी कर रहे हैं। आज आतंक की समस्या। मजहबी जंग आदिे देश की प्रमुख समस्या है।
  वन्दे मातरम,भारत माता की जय,जय हिन्द ये नारे क्रांतिकारियों के साथ हर पल रहते थे।
कर चले हम फिदा जाने तन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों
आज़ाद भारत मे डॉक्टर कलाम ने हमें विकसित देश बनाने के लिए जो विजन दिया है उसी अनुसार काम मे लग जाएं तभी हमारा स्वाधीनता दिवस मनाने की सार्थकता है
#राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
परिचय: राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ की जन्मतिथि-५ अगस्त १९७० तथा जन्म स्थान-ओसाव(जिला झालावाड़) है। आप राज्य राजस्थान के भवानीमंडी शहर में रहते हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है और पेशे से शिक्षक(सूलिया)हैं। विधा-गद्य व पद्य दोनों ही है। प्रकाशन में काव्य संकलन आपके नाम है तो,करीब ५० से अधिक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा आपको सम्मानित किया जा चुका है। अन्य उपलब्धियों में नशा मुक्ति,जीवदया, पशु कल्याण पखवाड़ों का आयोजन, शाकाहार का प्रचार करने के साथ ही सैकड़ों लोगों को नशामुक्त किया है। आपकी कलम का उद्देश्य-देशसेवा,समाज सुधार तथा सरकारी योजनाओं का प्रचार करना है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।