यह अचानक क्या हुआ? मुझ में ऐसी शक्ति कहां से आई? क्या मुझे भी मकड़ी ने काटा है? काटा है तो कब काटा है ? मुझे कुछ समझ में क्यों नहीं आ रहा है? अगर काटता तो दुकता ना ? लेकिन मैंने दर्द का अनुभव तो कभी नहीं किया। कहीं […]

बहत्तर साल की स्वतंत्र राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था के बाद भी देश में कई मुद्दे आज तक उलझे हुए हैं, जिनका समाधान केन्द्र सरकार नहीं कर पा रही है। जनता की मांग दो तरफा होने से सरकार ने भी आधे अधूरे निर्णयों को ही निरंतर बनाए रखा हैं। जिनमें से […]

हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं,बल्कि यह हमारे अल्फाजों को समेट,हमारी बातों को सरलता एवं सुगमता से कहने का विशेष माध्यम हैं। हिन्दी बिल्कुल हमारी की तरह ही हमसे जुड़ाव रखती है और हम भी मां हिन्दी के बिना अपने अस्तित्व की कभी कल्पना नहीं कर सकते। क्योंकि मां के बिना बेटे […]

सियासत की करवट, उधेड़बुन में उलझी मध्यप्रदेश कांग्रेस, बारिश के मौसम में भी भोपाल का बढ़ता तापमान, अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ के खिलाफ मंत्री के ऊँचें स्वर, आबकारी अधिकारी की सौदेबाजी, विधायकों को हिस्सा दिलवाना, अपनी ही सरकार के मंत्री का पुतला जलना, राजा-महाराजा का बगावत पर उतर आना, […]

क्या कोई ऐसास्कूल,विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान है जहां परमात्मा स्वयं पढ़ाते हो और वही एक मात्र शिक्षक व गुरु हो?जी हां , प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय एक ऐसी अनूठी आध्यात्म ज्ञान और चरित्र निर्माण की शिक्षण संस्था है जहां प्रतिदिन स्वयंं परमात्मा ही पढ़ाते है।जो पाठ प्रतिदिन ब्रह्माकुमारीज के 140 […]

जय दधीचि , भारतीय संस्कृति उत्सवों और महोत्सवों की संस्कृति है। पुनीत पावन पूजनीय यह भारत की भूमि है। ये अवतारों की भूमि है ये भूमि संस्कारो की भूमि है, सारी देव सत्ता अनेकों रूपो में यहा पर विद्यमान है भारत भूमि पर जन्म लेना ही इस बात का प्रमाण […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।