35 लाख से अधिक लोगों ने बदले अपने हस्ताक्षर, बना सबसे बड़ा हिंदी हस्ताक्षर अभियान

0 0
Read Time2 Minute, 53 Second

विश्व हिन्दी दिवस विशेष

मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने चलाया हस्ताक्षर बदलों अभियान

इंदौर। देश में हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की दिशा में मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा संचालित राष्ट्रव्यापी ‘हिंदी में हस्ताक्षर बदलो अभियान’ ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अब तक 35 लाख से अधिक लोगों ने देवनागरी लिपि में हस्ताक्षर करने की प्रतिज्ञा ली है और अपने हस्ताक्षर बदल लिए हैं। यह अभियान हिंदी भाषा के प्रति राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने का एक अनूठा प्रयास है।

संस्थान के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने कहा, ‘हस्ताक्षर व्यक्ति की पहचान का प्रतीक होता है। अंग्रेजी या अन्य लिपि में हस्ताक्षर करना गुलामी की मानसिकता का अवशेष है, जबकि देवनागरी में हस्ताक्षर करना हमारी मातृभाषा हिंदी और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान दर्शाता है। इस अभियान के माध्यम से हम हिंदी को राजभाषा से आगे बढ़ाकर राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के सपने को साकार कर रहे हैं।’

ज्ञात हो कि यह अभियान वर्ष 2017 में मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा आरम्भ किया था। वरिष्ठ भाषा आग्रही डॉ. वेदप्रताप वैदिक के संरक्षण में इस अभियान के माध्यम से अब तक 35 लाख से अधिक लोग जुड़े है, जिन्होंने अपने हस्ताक्षर अन्य भाषा से देवनागरी यानी हिन्दी में बदल दिए। इसके लिए संस्थान के पदाधिकारी एवं विभिन्न राज्यों की इकाइयों के द्वारा विद्यालय, महाविद्यालय एवं शहर इत्यादि में जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इस अभियान से अब तक 200 से अधिक महाविद्यालय और 20 से अधिक विश्वविद्यालय भी जुड़ें है। इस अभियान में देशभर में लगभग 15 हज़ार से अधिक हिन्दीयोद्धा सतत जनजागरण का कार्य कर रहे है, ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों माध्यमों से लोग हस्ताक्षर बदलने का संकल्प लें सकते है और इस अभियान से जुड़ सकते हैं।

matruadmin

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।