ये जीवन मेरा  कोरा  कागज़, खुशियों का ख़त लिख दे रब। आश  लगाए  बैठा  हूं मन में, तेरा संदेशा आएगा अब-तब। सफ़र  लंबा  इस  जीवन  का, दुर्घटनाओं से बचाना हर पल। दुर्गम पहाड़ चट्टान को चीरता, जैसे नदी  मदमस्त कल-कल। स्नेह करूणा के  हर अक्षर हो, तेरी कृपा ख़त का […]

यह बहुत बड़ी विडंबना है कि हिन्दी को तोड़ने वालों में हिन्दी के अपने ही लोग हैं। भोजपुरी के कुछ समर्थकों का यह विचार है कि हिन्दी भाषा से अलग होने पर ही भोजपुरी भाषा और संस्कृति का विकास हो पाए गा। वास्तव में यह उनका भ्रम है। भाषाविज्ञान की […]

पूज्य पिता जी की बाहों में, जीने का किरदार छिपा हैll ममतामई माँ के *रिश्ते* में, अमर प्रेम संसार छिपा हैll बहिना के राखी धागों में, पूजा पुण्य प्रणाम छिपा हैll नमन वंदना करके देखो, सच में चारों धाम छिपा हैll पिता-पुत्र के *रिश्ते* में, साहस त्याग निदान छिपा हैll […]

जग में सब का मान नहीं है, हीरों की अब खान नहीं है।। पहले सा अब  काम नहीं है, इतनी भी पहचान  नहीं है।। अपने ही रखते हैं  खंजर, जीना अब आसान नहीं है।। खूब मिलावट करते हैं क्यों? अब अच्छा सामान नहीं है।। जिसको हमने मान दिया था, करता […]

आल्हा छन्द* (हिन्दी भाषा पर) हम सबका अभिमान यही है , इससे सबकी है पहचान। सबसे प्यारी हिंदी भाषा, इसमें बसी हमारी जान।। मान बढ़ाती हम सबका यह, फिर भी इससे हम अनजान। सहज, सरल, मनभावन है ये, हिन्दुस्तां की ऊँची शान।। #कृष्ण कुमार सैनी”राज” दौसा,राजस्थान 

आज भी लुट रहा है, चीर नारी का। नारी, हर किसी पर है भारी। लेकिन न जाने क्यों हो रही है उसके साथ घटना दिन प्रतिदिन। कहते भी है कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता” , फिर भी कर रहे हैं, छल,कपट,अत्याचार नारी के साथ, हम और आप मिलकर। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।