इसको तो हिंदुस्तान कहो

 

satishchandra sharma
हिंदी है भाषा मात्र नहीं
भारत माता का मान कहो।
यह मानवता का जन्मपत्र
इसको तो हिंदुस्तान कहो।
        इसको संतों के आश्रम में
       मर्यादाओं ने पाला है ।
       इसकी साँसों में यज्ञ ,गन्ध
        ऋषियों -मुनियों ने डाला है।
               कबिरा की चादर कहो इसे
               इसको तुलसी ,रसखान कहो।
इसके आँगन हरिऔध,जायसी
केशव पुष्प खिला करते ।
इसके चरणों में नत बैठे
कितने रविदास मिला करते।
              मीरा बाई और सूरदास की
              कृष्ण भक्ति का गान कहो।
यह भारतेंदु की भाषा है
जय शंकर और निराला है।
इसको दिनकर जी,पन्त
महादेवी ने पोसा पाला है।
             मति राम,बिहारी,प्रेमचंद
             की काव्य कथा,गोदान कहो।
मैथिली शरण की काव्य कला
से, पुष्पित,सज्जित भाषा है।
यह माखन लाल चतुर्वेदी
के,पुष्पों की अभिलाषा है।
             इसको बच्चन की मधुशाला
भूूूषण का स्वाभिमान कहो।
यह किसी जाति, मजहब की
न,बस इंसानों की भाषा है ।
मानवता का है श्वांस तंत्र
यह जीवन की परिभाषा है।
            भारत ही नहीं विश्व भर में
            प्रसारण का अभियान कहो।
चौदह बहनों के साथ सदा
मिल जुल कर खाई-खेली है।
बहनों में सबसे बड़ी,विश्व
भाषाएं सखी- सहेली हैं।
           जो हटा रहे हैं आसन से
          उनका लेंगे वलिदान कहो।।
#डॉ0सतीश चंद्र शर्मा “सुधांशु”
बदायूँ (उत्तरप्रदेश)

matruadmin

Next Post

हिन्द की शान

Mon Jun 4 , 2018
मैं राष्ट्रभाषा मातृभाषा, हिंदी हिंदुस्तान की शान। बीते सात दशक आज़ादी अब तक क्यों न मिली पहचान ? दुनियाँ के सारे देशों को है निज भाषा पर अभिमान। सुनो पराई भाषा का तुम मुझे त्याग करते क्यों गान। उर्दू, आंग्ल, फ़ारसी सब को आत्मसात कर दिया है मान ।बीते…. मुझे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।