लौटना

cropped-cropped-finaltry002-1.png
इस बार लौटना
तो संपूर्ण होकर ,
बहती धाराओं के साथ लौटना ।
क्योंकि किसी का लौट आना
समय की कैद से लौटना होता है,
क्योंकि प्रेम की तीसरी आँख की तरह मृत्युजंय होता है किसी का लौट आना
किसी का लौट आना
इंतजार करने से ज़्यादा घातक हो जाता है।
इसलिए
जब कभी लौटना
मेरे पास तुम,
मर चुकी उन उम्मीदों के साथ लौटना
जिन्हें पूरा होना था,
उम्र के बिताऐ गए
उन उदास लम्हों के साथ लौटना
जिन्हें दुनिया में सबसे खूबसूरत होना था,
अपनी उन तमाम कोशिशों के साथ लौटना
जो तुमने उन लोगो के लिए की
जो तुम्हारे होने थे
तुम्हारे हो नहीं पाऐ।
इसलिए,
जब कभी लौटना
मेरे पास तुम,
पुराने पदचिन्हों के साथ
लौटना
क्योंकि इस तरह लौटाेगे तुम
तो बाकी बचे
रस्तो को गुन-गुनाया जा सकेगा फिर से,
बाक़ी बची छांव में दुनिया की
और हसीन धुने बनाई जा सकेगी,
बाक़ी रह गई
थोड़ी-सी जगह में एक दुनिया और बनाई जा सकेगी,
हज़ारों लिखी जा चुकी किताबों
के आख़िरी पन्नों को फिर से
लिखा जा सके।
परिचय :
नाम – फहीम अहमद
वर्तमान पता –  नई दिल्ली 
शहर – दिल्ली
शिक्षा – बी.ए ( इतिहास ) , बी.एड
कार्यक्षेत्र – अध्यापक
विधा – कविता, कहानी, नाटक
ब्लॉग – हुदहुद
अन्य उपलब्धियां – रंगकर्मी हूं ।
लेखन का उद्देशय – दुनिया की कुंठा की चित्रकारी करना।

matruadmin

Next Post

अधूरा चांद, अधूरी यादें......

Fri Jun 1 , 2018
मुझसे हुई आखिर क्या? बात है, तुझसे कभी ना हुई मुलाकात है। अब तो तेरा दीदार पाने को, ये जीवन जैसे वनवास है।। अधूरा चांद, अधूरी रातें, अधूरी यादें, अधूरी तेरी मेरी हर बात है। तुम मुझसे दूर हुई इस कदर, तुम समझी ना कभी मेरा जज़्बात है। तू सिर्फ […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।