तेरी जुल्फें

keshav
ए मेरे हमसफ़र,
ओ मेरे दिलबर,
तुझे पाकर!
तेरा मैं दीवाना हुआ,
इस जग से भी,
अब मैं अंजना हुआ,
मैं तो खुद से भी,
अब तो बेगाना हुआ।
तेरी जुल्फ़ें!
ओ कातिल अदाएं तेरी,
तेरी आँखों का काजल!
दिल चुरा ले गयी,
तेरी ओठों की!
मादक मुस्कुराहट मेरी,
तेरे चुरी की,
वो खनखनाहट मेरी,
तेरा चलना!
और वापिस पलटना तेरा,
कुछ पल के लिए!
मुझ से लिपटना तेरा,
जान लेगी मेरी-जान लेगी मेरी।
तूने कैसा!
ये जादू मुझपे किया,
दिल मेरा ले लिया,
मुझको पागल किया,
मैं तो पागल हुआ,
अब दीवाना हुआ,
तेरे प्यार में!
अब अनजाना हुआ।
तू मेरी हो गयी,
मैं तेरा हो गया,
तेरी मीठी सी बोली,
तेरे नैनों की गोली,
जान लेगी मेरी-जान लेगी मेरी।
तू जिंदगी है मेरी,
तू बन्दगी है मेरी,
तू मेरा प्यार है,
मेरा इकरार है,
तेरे आने से!
जीवन में बहार है,
तेरे बिना!
जीवन बेकार है,
तेरी मुस्कुराने की,
नजरों से मुझे,
जाम पिलाने की,
आदत अब!
जान लेगी मेरी-जान लगी मेरी।।
    #केशव कुमार मिश्रा

 परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।

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