बहती अमिय की धार में ,
जीवन के सरस सार में ।
प्रीति कलश को पूरा भर ,
अमिय आज थोड़ा छलका दें।
जीवन हुआ सिद्धांत हीन,
भावहीन और लक्ष्यहीन ।
डगमगाते इन डगों को ,
थोड़ी सीधी राह बता दें ।
साधलें सुर आज सब वो,
छेड़ दें मिल रागिनी वो ।
दिल के टूटे तार जुड़ें फिर,
ऐसा ही संगीत सुना दें।
मनुज समझे मनुजता को,
प्रकृति की शालीनता को ।
जुड़ सके अपनी जड़ों से,
सब को यह संदेश सुनादें।
जागृति का संदेश सुना दें,
एकता का स्वर जगा दें ।
#पुष्पा शर्मा
परिचय: श्रीमती पुष्पा शर्मा की जन्म तिथि-२४ जुलाई १९४५ एवं जन्म स्थान-कुचामन सिटी (जिला-नागौर,राजस्थान) है। आपका वर्तमान निवास राजस्थान के शहर-अजमेर में है। शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. है। कार्यक्षेत्र में आप राजस्थान के शिक्षा विभाग से हिन्दी विषय पढ़ाने वाली सेवानिवृत व्याख्याता हैं। फिलहाल सामाजिक क्षेत्र-अन्ध विद्यालय सहित बधिर विद्यालय आदि से जुड़कर कार्यरत हैं। दोहे,मुक्त पद और सामान्य गद्य आप लिखती हैं। आपकी लेखनशीलता का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है।
Mon Feb 26 , 2018
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