हिन्दी को माना बड़ी बैंक ने

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भारतीय स्टेट बैंक ने ग्राहक सेवा को बेहतर जाना और हिन्दी की शक्ति को माना
है,इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधन को बधाई देता हूँl हमारे एक मित्र जो,भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहक हैं और पिछले काफी समय से यह माँग कर रहे हैं कि नेट बैंकिंग संबंधी तमाम जानकारियाँ हिन्दी में भी दी जाएं ताकि अंग्रेजी न जानने वाले उन जैसे देश के 95 प्रतिशत लोग भी सभी जानकारियाँ प्राप्त कर सकें। ग्राहक सेवा के प्रति सचेत बैंक प्रबंधन ने उनकी मांग पर गौर करते हुए अब प्राय: अधिकांश जानकारियाँ हिन्दी में भी दे दी हैं और इस दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। पूरे बैंकिंग क्षेत्र के लिए यह प्रेरणादायक है। आशा है कि,निजी व सरकारी सभी बैंक अपनी कम्प्यूटर प्रणालियों(वेबसाइट,कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर,बैंकिंग,एसएमएस अलर्ट सुविधा आदि) में हिन्दी का समावेश करेंगे। आशा है कि,एसबीआई म्युचुअल फंड,एसबीआई कार्ड,एसबीआई कैप सिक्‍यूरिटी,एसबीआई जीवन बीमा,एसबीआई जनरल इंश्योरेंस आदि की कंप्यूटर की प्रणाली भी जल्द ही हिन्दी में  उपलब्ध होंगी। यदि ग्राहक माँग करेंगे तो जानकारियाँ हिन्दी में अवश्य मिलेंगी।
जागो ग्राहक जागो…l भारतीय स्टेट बैंक की नेट बैंकिंग संबंधी सुविधा की एक अब हिन्दी में ही मिल रही है l
                                                          #डॉ. एम. एल. गुप्ता ‘ आदित्य

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।