जिस दिन हम घाव पर लगने वाले झंडू बाम होगें,
न होगें कब्रिस्तान न श्मशान होगें।
न पडे़गी जरुरत हमें हथियारों की,
न सीमा पर शहीद जवान होगें।
जिस दिन हम…॥
स्वर्ग में शांति से सोए होगें भगवान,
न मंदिर-मस्जिद में लड़ रहे इंसान होगें।
हर तरफ फैली होगी शांति,
सबके बिगड़े काम होगें।
जिस दिन हम…॥
सुर्ख स्याही से लिखे भलाई की दीवारों पर,
नेक दिल वालों के नाम होगें।
सबके होगें दिल बड़े-बड़े,सब कुर्बान होगें,
कोई नहीं होगा दुनिया में अमीर-गरीब।
सिर्फ इंसान होगें,
जिस दिन हम…॥
न होगी बाजारों में कोई चीज महंगी,
बड़ी ईमानदारी से सारे काम होगें।
हर तरफ बंट रही होगी रहमत खुदा की,
माता-पिता उस दिन घर-घर में भगवान होगें।
जिस दिन हम…॥
(झंडू बाम:शब्दार्थ-मदद करने वाला, राहत प्रदान करने वाला,दुःख मिटाने वाला आदि)
#अजय जयहरि
परिचय : अजय जयहरि का निवास कोटा स्थित रामगंज मंडी में है। पेशे से शिक्षक श्री जयहरि की जन्मतिथि १८ अगस्त १९८५ है। स्नात्कोत्तर तक शिक्षा हासिल की है। विधा-कविता,नाटक है,साथ ही मंच पर काव्य पाठ भी करते हैं। आपकी रचनाओं में ओज,हास्य रस और शैली छायावादी की झलक है। कई पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन होता रहता है।