सपना

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ajay jayhari
जिस दिन हम घाव पर लगने वाले झंडू बाम होगें,
न होगें कब्रिस्तान न श्मशान होगें।
न पडे़गी जरुरत हमें हथियारों की,
न सीमा पर शहीद जवान होगें।
जिस दिन हम…॥
स्वर्ग में शांति से सोए होगें भगवान,
न मंदिर-मस्जिद में लड़ रहे इंसान होगें।
हर तरफ फैली होगी शांति,
सबके बिगड़े काम होगें।
जिस दिन हम…॥
सुर्ख स्याही से लिखे भलाई की दीवारों पर,
नेक दिल वालों के नाम होगें।
सबके होगें दिल बड़े-बड़े,सब कुर्बान होगें,
कोई नहीं होगा दुनिया में अमीर-गरीब।
सिर्फ इंसान होगें,
जिस दिन हम…॥
न होगी बाजारों में कोई चीज महंगी,
बड़ी ईमानदारी से सारे काम होगें।
हर तरफ बंट रही होगी रहमत खुदा की,
माता-पिता उस दिन घर-घर में भगवान होगें।
जिस दिन हम…॥
 (झंडू बाम:शब्दार्थ-मदद करने वाला, राहत प्रदान करने वाला,दुःख मिटाने वाला आदि)
               #अजय जयहरि
परिचय : अजय जयहरि का निवास कोटा स्थित रामगंज मंडी में है। पेशे से शिक्षक श्री जयहरि की जन्मतिथि १८ अगस्त १९८५ है। स्नात्कोत्तर तक शिक्षा हासिल की है। विधा-कविता,नाटक है,साथ ही मंच पर काव्य पाठ भी करते हैं। आपकी रचनाओं में ओज,हास्य रस और शैली छायावादी की झलक है। कई पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन होता रहता है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।