जख्म वो किसको दिखाएं

sachin mishara
दर्द वो किसको सुनाए,
यातनाएं सह रही थी
भावनाएं दह रही थी,
कौरवों के मध्य नारी
चीख करके कह रही थी,
क्यों नहीं आए कन्हैयाl
क्यों नहीं आए कन्हैयाll

कष्ट में तड़पा बदन जब,
शोर में डूबा सदन जब
नुच रहा था वक्ष मेरा,
मौन था हर पक्ष मेरा
रक्त से लथपथ पड़ी मैं,
प्रश्न तुमसे कर रही थी
क्यों नहीं आए कन्हैयाl
क्यों नहीं आए कन्हैयाll

वार जितनी बार मैंने,
सह लिए वो वार कम थे
और नयनों से छलकते,
आंसूओं के तार कम थे
ज़ालिमों के हाथ मेरी,
लुट रही अस्मत बचाने
क्यों नहीं आए कन्हैयाl
क्यों नहीं आए कन्हैयाll

चल रही हूं लड़-खड़ाकर,
चोट ऐसी खा चुकी हूं
मैं कली से फूल बनकर,
टूटकर मुरझा चुकी हूं
प्रश्न अंतिम है बिखरते,
ख़्वाब तुम मेरे बचाने
क्यों नहीं आए कन्हैयाl
क्यों नहीं आए कन्हैया…ll

#सचिन मिश्रा ‘साधारण’

परिचय : सचिन मिश्रा का साहित्यिक उपनाम-साधारण और जन्मतिथि-२४ अगस्त १९९४ है। उन्नाव में जन्मे सचिन जी वर्तमान में लखनऊ में रहते हैं। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश निवासी श्री मिश्रा ने बी.कॉम. की शिक्षा ली है और कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप श्रृंगार रस के कवि होकर गीत रचते हैंl आपके लेखन का उद्देश्य-रुचि हैl  

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।