
मंजिल मिले ना मिले,
सीढ़ी जरूर चढ़ना।
लोगों के तानों से दूर,
लक्ष्य की ओर बढ़ना॥
कठिन हैं सफलता के पथ,
कभी ना लड़खड़ाना।
साजिशों से भरी जिन्दगी,
खुद को बचाना न घबराना॥
तोड़ देंगे तुझे,
खुद को जोड़ लेना।
आँसू ही मिलते यहाँ,
सुधा समझ पी लेना॥
साथ छोड़ देंगे,
तन्हाई से दोस्ती कर लेना।
बाधा हजार हैं
निवारण ढूंढ लेना॥
बुराई को नजरंदाज कर,
ये कलियाँ खिल उठेंगी।
हौंसले की उड़ान भर,
सफलता कदम चूमेगी॥
#सुमिधा सिदार ‘हेम’
परिचय : सुमिधा सिदार का साहित्यिक उपनाम-हेम(पति का नाम और वही आदर्श)है। १३ सितम्बर १९९० को जन्मीं सुमिधा सिदार का जन्म स्थान-ग्राम कुण्डापाली है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में महासमुंद जिले के ग्राम-सरकण्डा में रहती हैं। आपकी शिक्षा-बी.ए. और कार्यक्षेत्र-सरकण्डा ही है।
सामाजिक क्षेत्र में आप लोगों को बेटी की महत्ता बताने के साथ ही हूँ तनाव से राहत के लिए हँसाने की कोशिश करती हैं। लेखन विधा-कविता,कहानी,एकांकी, हाइकु,तांका एवं शायरी है। आपकी नजर में मेरी लिखी रचना कोई दूसरा पढ़ता है,वही सम्मान है। आप ब्लॉग पर भी लिखती हैं। आपके अनुसार लेखन का उद्देश्य-समाज की औरतों के प्रति है, क्योंकि,गोंडवाना समाज को निखारना है,ताकि महिला वर्ग घर,गली,गाँव से बाहर निकलकर समाज के बारे में सोंचे।
Mon Jan 22 , 2018
जीवन में मुझे कुछ शब्दों से काफी नारजगी मिली,जो कभी पूरा हुआ ही नहीं,भले उसे किसी तरह उपयोग किया जाए। अगर हुआ भी तो सिर्फ भाग्यवालों का ही। जैसे-रिश्ता,ज़िसमें कभी-न-कभी मनमुटाव आ ही जाता है। कैसा भी रिश्ता हो-माँ से बेटे का,पिता से बेटे का, चाचा से भतीजा से,भाई से […]