दंगा

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mukesh sing
भाषणों का जहर घुला था,
मनभावन एक शहर जला था।
हो रही थी अनर्गल बातें,
जय जयकारों का शोर मचा था।
फिर शब्दों के बाण छूटे,
और द्वैष की एक लहर उठी।
जैसे शांत खड़ी उस भीड़ की,
संयम की मर्यादा टूटी।
कल तक जो भाई थे,
उन पे भाई ने आज प्रहार किया।
प्रति उत्तर में भाई ने,
अपनों का संहार किया।
खूब चले लाठी-डंडे,
मानवता का अंतिम-संस्कार हुआ।
जैसे अपनेपन का राग यहां,
एक क्षण में था बेकार हुआ।
नेताओं की चक्की में,
जाने मजलूम कितने पिस गए।
इस जात-पात के दंगे में,
बस आमजन हैं घिस रहे ?
इस तर्कविहीन लड़ाई में,
कुछ ऐसे लोग बेजान हुए।
जो न थे इस जात-न उस जात के,
थे पेट की ज्वाला में हलाकान हुए।
अब मातम उन घरों का देखने,
नहीं कोई है जा रहा ?
आज भी मासूम वहां बिलखते हैं,
उनकी खबर न कोई लगा रहा॥
           # मुकेश सिंह
परिचय: अपनी पसंद को लेखनी बनाने वाले मुकेश सिंह असम के सिलापथार में बसे हुए हैंl आपका जन्म १९८८ में हुआ हैl 
शिक्षा स्नातक(राजनीति विज्ञान) है और अब तक  विभिन्न राष्ट्रीय-प्रादेशिक पत्र-पत्रिकाओं में अस्सी से अधिक कविताएं व अनेक लेख प्रकाशित हुए हैंl तीन  ई-बुक्स भी प्रकाशित हुई हैं। आप अलग-अलग मुद्दों पर कलम चलाते रहते हैंl 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।