
पल्लल्वित हो,प्रगतिशील हो
ऐसा रोपित बीज हो,
बहुजन हिताय,बहुजन सुखाय
ऐसी अपनी नीति हो,
न धर्म हो न जाति हो
न भाषावादी रीति हो,
हो बसन्त चहुओर
न ज्यादा गर्म हो न शीत हो,
हिन्दू मुस्लिम सिख पारसी
आपस में सब मीत हो,
औंधे मुँह गिरे हरदम
जो छल प्रपंची ढीठ हो,
उन पर कभी न वार कर
जिनकी आगे पीठ हो,
पाकिस्तानी धमकियों के
विरुद्ध उठती टीस हो,
जब भी अस्मिता पर हो प्रहार
मुँहतोड़ अपनी रणनीति हो,
तम में प्रकाश में हर कहीं
बस हमारी जीत हो,
जर्मनी,जापान,इटली से
बेहतर तकनीकी हो,
आंधी,तूफ़ान,संघर्ष में भी।
बस जीत ही जीत हो॥
सम्पदा मिश्रा
परिचय : सम्पदा मिश्रा की जन्मतिथि-१५ नवम्बर १९८० और जन्म स्थान-महाराष्ट्र है। आप शहर- इलाहाबाद(राज्य-उत्तर प्रदेश) में रहती हैं। एम.ए. एवं बी.एड. तक शिक्षित सम्पदा जी का कार्यक्षेत्र-बतौर प्रवक्ता अर्थशास्त्र(डाईट-इलाहाबाद) है। आपकी विधा-गद्य एवं पद्य है। आप स्वर्ण पदक विजेता हैं और लेखन का शौक है। लेखन का उद्देश्य-समाज को नई दिशा देना है।
Fri Jan 12 , 2018
जब भी तुम उदास होते हो, उदासी मेरे चेहरे पर छा जाती है। आँसूओं से आँखें तेरी नम होती है, बरसात मेरी आँखों से हो जाती है। न जाने कौन-सा रिश्ता है हम दोनों में, तू रातभर करवट बदलता है,नींद मुझे भी नहीं आती है। तेरी मुस्कुराहट मेरे होंठों की […]