इंसानियत महके चमन
में,
ज़िंदादिली का त्राण हो
स्वार्थपरता की मुफ़लिसी
हो,
भीरुता निष्प्राण हो
ऐसी फ़िज़ा बने वतन की,
चहुँओर हर्ष ही हर्ष हो।
है प्रभु!! मेरे सपनों का,
ऐसा भारत वर्ष हो॥
उन्माद की उल्टी फ़िज़ाएं,
स्थायित्व न ले सकें
रूढ़ि की काली घटाएं
पुनः न फिर घिर सकें,
परिंदों की मानिंद जन में
स्वीकृति सहर्ष हो।
है प्रभु!! मेरे सपनों का,
ऐसा भारतवर्ष हो॥
अवसाद की तिरछी रेखाएं,
हैं नियति की तान
फिर भी निरन्तर बढ़ाएं,
अपने कुटुम्ब का मान
कर्तव्य पथ पर डटे रहें,
गर सामने ही उत्कर्ष हो।
है प्रभु!! मेरे सपनों का,
ऐसा भारत वर्ष हो॥
दमनकारी नीतियां पनपे
नहीं,
निर्मम कुरीतियां जन्मे
नहीं
गर कहीं भी द्वंद हो तो,
पहले विचार-विमर्श हो।
है प्रभु!! मेरे सपनों का
ऐसा भारतवर्ष हो॥
सम्पदा मिश्रा
परिचय : सम्पदा मिश्रा की जन्मतिथि-१५ नवम्बर १९८० और जन्म स्थान-महाराष्ट्र है। आप शहर- इलाहाबाद(राज्य-उत्तर प्रदेश) में रहती हैं। एम.ए. एवं बी.एड. तक शिक्षित सम्पदा जी का कार्यक्षेत्र-बतौर प्रवक्ता अर्थशास्त्र(डाईट-इलाहाबाद) है। आपकी विधा-गद्य एवं पद्य है। आप स्वर्ण पदक विजेता हैं और लेखन का शौक है। लेखन का उद्देश्य-समाज को नई दिशा देना है।
Wed Jan 3 , 2018
इतना करो न प्यार मुझे, खोने का तमको डर लगता है। हो जाऊँगा फिर मैं तन्हां, दिल को ऐसा अक्सर लगता हैll एक अकेला आशिक़ ये दिल, ढूंढेगा तुझको फिर किन गलियों में। रह जाऊंगा फिर मैं तन्हां, तेरी ही यादों की गलियों मेंll इतना करो न प्यार मुझे, खोने […]