लो खुल गया चुनावी पिटारा।

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sajjad haidar

जी हाँ भारत की राजनीति में चुनावी पिटारा खुलना कोई नई बात नहीं है। इस प्रकार का पिटारा लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां चुनावी मौसम में खोलती रही हैं, जिसके माध्यम से देश की जनता को मुँगेरी लाल के हसीन सपने दिखाकर सियासी पार्टियां फिर चली जाती हैँ।
यदि शब्दों को परिवर्तित करके कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा कि यह चुनावी पिटारा तो अबतक भानमति का पिटारा ही साबित हुआ है। इससे इतर और कुछ नहीं। ध्यान दीजिए कि मौजूदा वर्तमान सरकार ने भी बहुत बड़े-बड़े वायदे किए थे जिसे बताने की आवश्यकता नहीं है। अतः कोई भी पार्टी इस भानमति के पिटारे से अछूती नहीं है। सभी सियासी पार्टियां चुनावी मौसम में भानमति का पिटारा अपने साथ बगल में दबाकर लेकर चलती हैं। जहाँ भी तनिक मौका मिला बस फिर क्या भानमति की पिटारा खोल दिया और खेल शुरू कर दिय़ा। सियासी पार्टियों का यह सबसे बड़ा चुनावी हथियार होता है। क्योंकि, इसी पिटारे के सहारे सियासी पार्टियां चुनाव में अपनी नैया पार करने की भरपूर कोशिश करती हैं। पिटारा मात्र सत्ता के लोभ में ही बनाया जाता है। जिसे एक बहुत ही खूबसूरत नाम दे दिया जाता है “घोषणा पत्र” आईए देखते हैं कांग्रेस के घोषणा पत्र को।
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस घोषणा पत्र को कांग्रेस नें “जन आवाज” नाम दिया गया है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि घोषणा पत्र में 5 प्रमुख वादे किए गए हैं। किसानों के लिए अलग बजट लाया जाएगा। साथ ही कृषि कर्ज में दबे किसानों पर फौजदारी (क्रिमिनल) मामला दर्ज नहीं होगा। राहुल ने ‘गरीबी पर वार, 72 हजार’ का एक नया नारा भी दिया। घोषणा पत्र के मुताबिक, कांग्रेस देशद्रोह को परिभाषित करने वाली धारा 124 (ए) को भी खत्म किया जाएगा।
राहुल ने कहा कि हम पिछले काफी समय से झूठ सुन रहे हैं, वो भी प्रधानमंत्री जैसे गरिमायुक्त पद पर विराजमान व्यक्ति से। इसीलिए हमने अपने घोषणा पत्र में कोई भी इस प्रकार की योजना अथवा कार्य नहीं रखा जिसे हम नहीं कर सकें। इसीलिए हमने जनता से सच्चे वायदे किए हैं। क्योंकि, जब हम जनता से न्याय के बारे में बोलते हैं तो जनता हमारी बात बड़े ही ध्यान से सुनती है क्योंकि, देश की जनता अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया, “हमारा निशान पंजा है और हम अपने निशान के आधार पर ही घोषणा पत्र में पांच बड़े वायदे भी कर रहे हैं। देश की जनता हमारे घोषणा पत्र पर विश्वास करे, हम जनता से यह आग्रह करते हैं। जिस तरह हमने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में अपने वायदे के मुताबिक किसानों का कर्ज माफ किया, ठीक इसी प्रकार इन वायदों को भी हम पूरा करेंगे। मैं कभी भी झूठे वायदे नहीं करता।
कांग्रेस के वायदे की सूची क्रमवार कुछ इस प्रकार है।
1. न्याय
राहुल ने कहा कि पहला उद्देश्य न्याय व्यवस्था का है। हम किसी के साथ भी अन्याय नहीं करेंगें, और कदापि झूठे वायदे नहीं करेंगें। जबकि प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि अगर हमारी सरकार बनेगी तो हम 15 लाख रुपए अकाउंट में डालेंगे। वो झूठ था। हमने उनकी बात पकड़ी और घोषणा पत्र कमेटी से पूछा कि हिंदुस्तान की जनता के अकाउंट में कांग्रेस कितना पैसा डाल सकती है। तो कमेटी ने मुझे 72 हजार नंबर दिया। गरीबी पर वार 72 हजार। एक साल में 72 हजार कांग्रेस पार्टी गरीबों के अकाउंट में डालेगी। मोदीजी ने नोटबंदी और जीएसटी से जो अर्थव्यवस्था को क्षति पहुंचाई है हम उसे पुनः वापस पटरी पर लाने का भरसक प्रयास करेंगे।
2. रोजगार
देश के अन्दर सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का है। आज 22 लाख सरकारी नौकरियों के पद खाली पड़े हैं। उन्हें वर्तमान सरकार ने नहीं भरा यह देश की जनता के प्रति अन्याय है। लेकिन, कांग्रेस पार्टी उन सभी पदों को मार्च 2020 तक भर देगी साथ ही 10 लाख युवाओं को ग्राम पंचायत स्तर पर नौकरी भी देने की व्यवस्था करेगी। क्योंकि, हम मेक इन इंडिया का एक ऐसा रूप लेकर आएंगे जोकि, दुनिया में कहीं भी नहीं है। अगर हमारा युवा बिजनेस खोलना चाहता है तो तीन साल के लिए युवाओं को बिजनेस के लिए कोई परमिशन नहीं लेनी होगी। कांग्रेस इसके लिए सभी दरवाजों को खोल देगी।
3. किसान
हम मनरेगा में रोजगार के 150 दिन पक्के करना चाहते हैं। हमारे हिसाब से किसानों का एक अलग बजट होना चाहिए। किसानों को मालूम होना चाहिए कि उनके लिए कितना बजट दिया जा रहा है और उन्हें कितना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलेगा। क्योंकि,नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग देश की जनता का पैसा लेकर भाग जाते हैं। लेकिन, किसान अगर बैंकों का पैसा नहीं दे पाता तो उसे जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया जाता है। जोकि गलत है, गरीब और अमीर दोनों के लिए एक समान कानून होने चाहिए। हमने यह फैसला किया है कि अगर किसान पैसा न लौटा पाए तो वो क्रिमिनल ऑफेंस नहीं सिविल ऑफेंस हो।
4. शिक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में भी राहुल ने कहा कि हमने बड़ा निर्णय लिया है कि जीडीपी का 6% हिस्सा देश की शिक्षा में हम देंगे जिससे कि आईआईटी, आईआईएम जैसे बड़े संस्थानों तक सबकी पहुंच हो सके। क्योंकि हम इसे सबके लिए बनाना चाहते हैं। जिससे कि हर गरीब का बेटा देश का वैज्ञानिक एवं इन्जीनियर बन सके।
5. हेल्थ सेक्टर
हेल्थ सेक्टर में मोदी सरकार एक योजना लाई है। इंश्योरेंस का पैसा प्राइवेट अस्पतालों की जेब में डाले जाएंगे। लेकिन, हम सरकारी व्यवस्थाओं को मजबूत करने का काम करेंगे। हम तय करेंगे कि गरीबों को अच्छी से अच्छी सुविधाएं मिलें। साथ ही देशद्रोह की धारा 124-ए भी खत्म की जानी चाहिए ‘‘भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (जो कि देशद्रोह के अपराध को परिभाषित करती है) जिसका दुरुपयोग हुआ और बाद में नए कानून बन जाने से उसकी महत्ता भी समाप्त हो गई है, अतः उसे खत्म किया जाना चाहिए।
अवगत करा दें कि यह चुनावी घोषणा पत्र है इसकी कहानी ही अजीब होती है। देश की जनता के सामने नेतागण तो पत्थर से तेल भी निकालने की बात सदैव से ही करते आए हैं। लेकिन, अभी तक का इतिहास रहा कि किसी भी राजनीतिक पार्टी ने कभी भी अपने घोषणा पत्र के आधार पर कार्य ही नहीं किया। यह एक अडिग सत्य है। जिसे नकारा नहीं जा सकता। क्योंकि, जनता की दयनीय स्थिति इस बात का प्रमाण है। देश की जनता के प्रति किस नेता का कितना प्यार उमड़ा उसे शब्दों में कहने की आवश्यकता नहीं है। कर्ज के बोझ से फांसी के फंदे पर लटकता हुआ किसान और भुखमरी के कगार पर खड़ी भारत की एक बड़ी आबादी इसका मजबूत प्रमाण है। अत्यंत दुखःद है कि नेताओं के बंगलों की चमक दिन प्रतिदिन तेजी से बढ़ी परन्तु देश के निर्बल जनता की स्थिति और विचित्र होती चली गई। जोकि आज चिंताजनक है।

विचारक ।
(सज्जाद हैदर)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।