राधा केवल प्रेयसी या…

kumari archana
राधा कृष्ण के बिन
हमेशा आधी ही रही,
पूर्णता के लिए
वैवाहिक बंध चाहिए,
जो उसे न मिल सका
पर क्यों ?
क्या द्वापर युग में
राजा महराजा और उनकी प्रजा
एक पत्नीधारी थे ?
कोई उपपत्नियाँ नहीं रखते थे,
क्या सवाल का कोई जबाब है ?
प्रेयसी केवल प्रेम करने व
कामपूर्ति  के लिए होती है,
विवाह के लिए नहीं
परन्तु क्यों ?
कृष्ण ने रासलीला तो वृन्दावन में
राधा और गोपी संग रचाई,
पर मथुरा की पटरानी क्यों न बनाई !
विष्णुजी को नारद मुनि का श्राप था,
रामराज्य में सीता का परित्याग
कृष्ण अवतार में राधा से वियोग!
अपराधी तो कृष्ण थे,
पर अपराधन क्यों राधा बनी
जो उसे वैराग जीवन मिला,
विवाहिता का सुख न मिला!
सदियों से पुरूषों द्वारा छलने
की एक प्रथा चली आई,
आज भी चल रही
प्रेयसी प्रेम व कामपूर्ति की,
वस्तु में तब्दील हो गई
जो मान प्रेयसी राधा को
बिन पत्नी बने मिला,
कृष्ण से पहले राधा का नाम जुड़ा
वहीं आज पुरूष के बाद नाम
जब किसी स्त्री का नाम जुड़ता तो,
पिता,परिवार,कुल और गोत्र
की नाम व इज्जत चली जाती
कभी ‘लड़की मित्र’ तो रखनी बन जाती
कहीं ‘ऑनर किलिंग’ तो
कहीं हत्या कर दी जाती,
तो कहीं आत्महत्या को विवश।
समाज ने तो कभी भी प्रेयसी को
धर्मपत्नी का दर्जा न दिया,
लोकतांत्रिक देशों के न्यायालय ने
प्रेयसी को कानूनी हक़ दिया,
विवाहिता समझी जाएगी
बिन पारम्परिक रीति-रिवाजों के भी
यदि पत्नी कर्म निभाती हो।
काश् राधा के युग में
न्याय की सर्वोच्च व पारदर्शी व्यवस्था होती तो,
रुक्मणी की जगह राधा होती॥
                                                   #कुमारी अर्चना

परिचय: कुमारी अर्चना वर्तमान में राजनीतिक शास्त्र में शोधार्थी है। साथ ही लेखन जारी है यानि विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में निरंतर लिखती हैं। आप बिहार के जिला-पूर्णियाँ ( हरिश्चन्द्रपुर) की निवासी हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।