इस दुनिया में आए हैं हम,
इसका भी कोई कारण होगा।
इस दुनिया को तारने वाला,
कोई तो एक तारण होगा॥
प्रतिभाएँ सभी में होती,
हर जीव व जन्तु में।
बिच्छू में क्यों डंक है पैनी,
इसका भी कोई कारण होगा ?
सुख-दुख जीवन के दो सत्य,
एक आता,एक जाता है।
सदा सुख या दुख क्यों नहीं,
इसका भी कोई कारण होगा ?
घास खाता हिरण है वन में,
सींग उसे ईश्वर ने दिया।
मगर,मनुज के पास नहीं क्यों,
इसका भी कोई कारण होगा ?
सुख-दुख और यश-अपयश,
हानि-लाभ व मिलन-जुदाई।
एक देता है एक लेता है,
इसका भी कोई कारण होगा ?
बगुले की गर्दन क्यों सीधी,
और बाघ के दंत नुकीले।
शीशे-सा सुन्दर क्यों नर का ,
इसका भी कोई कारण होगा ?
आज जो है दिखता है हमको,
निश्चित है कल नहीं होगा।
समता सीख के लिए ‘भवन’,
परिवर्तन ही कारण होगा॥
#रामभवन प्रसाद चौरसिया
परिचय : रामभवन प्रसाद चौरसिया का जन्म १९७७ का और जन्म स्थान ग्राम बरगदवा हरैया(जनपद-गोरखपुर) है। कार्यक्षेत्र सरकारी विद्यालय में सहायक अध्यापक का है। आप उत्तरप्रदेश राज्य के क्षेत्र निचलौल (जनपद महराजगंज) में रहते हैं। बीए,बीटीसी और सी.टेट.की शिक्षा ली है। विभिन्न समाचार पत्रों में कविता व पत्र लेखन करते रहे हैं तो वर्तमान में विभिन्न कवि समूहों तथा सोशल मीडिया में कविता-कहानी लिखना जारी है। अगर विधा समझें तो आप समसामयिक घटनाओं ,राष्ट्रवादी व धार्मिक विचारों पर ओजपूर्ण कविता तथा कहानी लेखन में सक्रिय हैं। समाज की स्थानीय पत्रिका में कई कविताएँ प्रकाशित हुई है। आपकी रचनाओं को गुणी-विद्वान कवियों-लेखकों द्वारा सराहा जाना ही अपने लिए बड़ा सम्मान मानते हैं।
Tue Dec 19 , 2017
सर्द रातों में ठिठुरती जिंदगी, फुटपाथ पर,मन्दिरों पर, स्टेशन पर… और उन तमाम जगह, जो बन जाता है उन यतीमों का आशियाना, जो तलाशते हैं थोड़ा-सा सुकून, थोड़ी-सी नींद उस खुले आसमान तले, जो बना देती है सर्द भरी रातों को बर्फ की तरह। जिसमें गुजारते हैं वो सभी अपनी […]